झारखंड के बीहड़ों में अभी भी छुपे हैं 4.50 करोड़ के नक्सली, 32 मोस्ट वांटेड की अभी भी है जवानों को तलाश,जानिये लिस्ट में कौन-कौन
झारखंड पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में अब भी 32 माओवादी शामिल हैं। इन पर कुल 4.47 करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। दो बड़े माओवादियों पर एक-एक करोड़ का इनाम है।

रांची। देश में भले ही नक्सलवाद के खत्म होने का औपचारिक ऐलान हो गया है, लेकिन हकीकत में अभी भी जंगलों में कई खूंखार नक्सली छुपे हैं। अकेले झारखंड में अभी 32 मोस्ट वांटेड हैं। इन सभी पर कुल 4 करोड़ 47 लाख रुपये का इनाम घोषित है। हालांकि सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के चलते इनकी गतिविधियां लगभग शून्य हो चुकी हैं और अधिकांश माओवादी भूमिगत हो गए हैं या अपना पुराना इलाका छोड़ चुके हैं।
दो माओवादियों पर एक-एक करोड़ का इनाम
झारखंड पुलिस की सूची में सबसे ऊपर पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा और सेंट्रल कमेटी सदस्य असीम मंडल हैं। दोनों पर एक-एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। ये लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़े वांछित माओवादी बने हुए हैं।
कुल 4.47 करोड़ का इनाम
झारखंड पुलिस की वांटेड सूची में शामिल 32 माओवादियों पर घोषित इनाम इस प्रकार है—
- 2 माओवादी – ₹1 करोड़ (कुल ₹2 करोड़)
- 2 माओवादी – ₹25-25 लाख (कुल ₹50 लाख)
- 5 माओवादी – ₹15-15 लाख (कुल ₹75 लाख)
- 7 माओवादी – ₹10-10 लाख (कुल ₹70 लाख)
- 8 माओवादी – ₹5-5 लाख (कुल ₹40 लाख)
- 4 माओवादी – ₹2-2 लाख (कुल ₹8 लाख)
- 4 माओवादी – ₹1-1 लाख (कुल ₹4 लाख)
कुल इनामी राशि: ₹4 करोड़ 47 लाख।
बड़े कमांडरों की गतिविधियां पड़ीं ठप
सूची में ब्रजेश गंझू और अजय महतो जैसे 25-25 लाख के इनामी भी शामिल हैं। वहीं मोछू उर्फ मेहनत समेत पांच रीजनल कमांडरों पर 15-15 लाख रुपये का इनाम घोषित है। इसके अलावा जोनल, सब-जोनल, एरिया कमांडर और कैडर स्तर के माओवादी भी पुलिस के रडार पर हैं।
सारंडा समेत कई इलाकों से हटे बड़े माओवादी
सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और विशेष अभियानों के कारण बड़े माओवादी नेताओं ने सारंडा जैसे गढ़ों से भी दूरी बना ली है। कई नक्सली अपना प्रभाव क्षेत्र छोड़कर दूसरे राज्यों या अज्ञात ठिकानों पर चले गए हैं। पुलिस का दावा है कि उनकी सक्रियता पहले की तुलना में काफी कम हो गई है, लेकिन गिरफ्तारी के लिए अभियान लगातार जारी है।
हालांकि कुछ इनपुट ऐसे भी है कि ये नक्सली देश छोड़कर नेपाल जैसे जगहों पर अपना सुरक्षित ठिकाना ले चुके हैं। जबकि कुछ फिलहाल अंडरग्राउंड हैं। अभी भी गाहे बगाहे नक्सलियों के पर्चे छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आ रहे हैं, जाहिर है नक्सलियों की गतिविधियां शांत जरूर हुई है, लेकिन खत्म नहीं हुई है।








