रांची: झूठ बोलकर बनाया शारीरिक संबंध तो ये धोखा, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला, अविवाहित बता दूसरी महिला से संबंध बनाना असहमति
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाकर शादी का झांसा देकर बनाए गए शारीरिक संबंधों में महिला की सहमति कानूनन वैध नहीं मानी जाएगी। आरोपी की याचिका खारिज।

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि कोई पुरुष अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाकर किसी महिला को शादी का झांसा देता है और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता है, तो ऐसी स्थिति में महिला की सहमति कानून की नजर में वैध नहीं मानी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि धोखे और झूठ के आधार पर प्राप्त सहमति, वास्तविक सहमति नहीं होती।
हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
जस्टिस एस.के. द्विवेदी की एकल पीठ ने आरोपी रमेश साहू की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी। आरोपी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
खुद को अविवाहित बताकर किया शादी का वादा
मामले के अनुसार, पीड़िता एक विधवा महिला है। आरोप है कि रमेश साहू ने खुद को अविवाहित बताकर महिला के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। शादी का भरोसा दिलाने के बाद उसने महिला से कई बार शारीरिक संबंध बनाए।जब महिला ने विवाह का दबाव बनाया, तो आरोपी टालमटोल करने लगा। बाद में महिला को पता चला कि रमेश साहू पहले से विवाहित है और उसके बच्चे भी हैं।
सच्चाई सामने आने पर दर्ज कराई एफआईआर
धोखे का पता चलने के बाद पीड़िता ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। इसके बाद आरोपी ने निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने उसकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा- छल से मिली सहमति, सहमति नहीं
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी महिला की सहमति तथ्यों की गलत जानकारी या छल के आधार पर प्राप्त की जाती है, तो उसे कानूनन सहमति नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा कि आरोपी ने जानबूझकर अपनी पहली शादी और बच्चों की जानकारी छिपाई। यदि महिला को वास्तविक स्थिति का पता होता, तो वह शारीरिक संबंध बनाने के लिए सहमत नहीं होती।
सिर्फ वादा तोड़ने का नहीं, धोखाधड़ी का मामला
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल शादी का वादा पूरा नहीं करने का नहीं है, बल्कि शुरुआत से ही सच्चाई छिपाकर महिला की सहमति हासिल करने का है। ऐसे मामलों में प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी और छल के तत्व स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। इसलिए मामले की सुनवाई जारी रहेगी।








