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Jharkhand High Court: कर्मचारी के No Work-No Pay पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, देना होगा, पूरा वेतन, प्रमोशन व लाभ

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि बर्खास्तगी रद्द होने के बाद नियोक्ता विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं करता, तो कर्मचारी पर 'No Work, No Pay' लागू नहीं होगा। CCL को बकाया वेतन और सभी सेवानिवृत्ति लाभ देने का आदेश।

Jharkhand High Court No Work No Pay Judgment। झारखंड हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े एक अहम मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी अदालत द्वारा निरस्त कर दी जाती है और नियोक्ता तय समय में दोबारा विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं करता, तो उस कर्मचारी पर ‘No Work, No Pay’ (काम नहीं तो वेतन नहीं) का सिद्धांत लागू नहीं होगा।अदालत ने कहा कि जब कर्मचारी को काम से दूर रखने के लिए स्वयं नियोक्ता जिम्मेदार हो, तब उसे वेतन, पेंशन और अन्य सेवा लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

CCL का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने सीसीएल (Central Coalfields Limited) के 24 दिसंबर 2014 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारी बैजनाथ महतो को बकाया वेतन देने से इनकार कर दिया गया था।कोर्ट ने सीसीएल को निर्देश दिया कि वह 1989 से पुनर्बहाली तक का बकाया वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ छह सप्ताह के भीतर अदा करे।

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: बर्खास्तगी रद्द होने के बाद विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं हुई तो कर्मचारी को मिलेगा पूरा बकाया वेतन

क्या है पूरा मामला?

बैजनाथ महतो को वर्ष 1981 में विस्थापित व्यक्ति (Displaced Person) के रूप में सीसीएल में नौकरी मिली थी।वर्ष 1989 में उनके खिलाफ चोरी का मामला दर्ज होने के बाद उन्हें निलंबित कर सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।बाद में आपराधिक मुकदमे में वे बरी (Acquitted) हो गए। इसके बाद उन्होंने बर्खास्तगी को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।

2009 में हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द कर दी थी

वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी का आदेश रद्द करते हुए सीसीएल को निर्देश दिया था कि तीन महीने के भीतर नई विभागीय कार्रवाई पूरी की जाए।लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद सीसीएल ने वर्षों तक न तो विभागीय जांच पूरी की और न ही कर्मचारी को सेवा में बहाल किया।आखिरकार 15 जनवरी 2015 को बैजनाथ महतो की पुनर्बहाली हुई और उसी वर्ष 30 नवंबर 2015 को वे सेवानिवृत्त हो गए।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियोक्ता की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारी नहीं भुगतेगा; मिलेगा पूरा वेतन और रिटायरमेंट लाभ

हाईकोर्ट ने ‘No Work, No Pay’ पर क्या कहा?

अपने फैसले में अदालत ने कहा कि—

  • जब बर्खास्तगी पहले ही रद्द हो चुकी थी, तब कर्मचारी को काम से दूर रखना नियोक्ता की जिम्मेदारी थी।
  • कर्मचारी लगातार अपने अधिकारों के लिए अदालत में संघर्ष करता रहा।
  • उसने कभी नौकरी पर लौटने की इच्छा नहीं छोड़ी।
  • इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उसने काम नहीं किया, बल्कि उसे काम करने का अवसर ही नहीं दिया गया।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी पक्ष अपने ही गलत कार्य का लाभ नहीं उठा सकता।

कर्मचारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए मिसाल माना जा रहा है जिनकी बर्खास्तगी अदालत से रद्द होने के बावजूद विभाग समय पर कार्रवाई पूरी नहीं करता। ऐसे मामलों में नियोक्ता केवल ‘No Work, No Pay’ का हवाला देकर वेतन रोक नहीं सकता, यदि कर्मचारी को काम से दूर रखने के लिए वही जिम्मेदार हो।

फैसले की मुख्य बातें-

  • हाईकोर्ट ने CCL का वेतन रोकने वाला आदेश रद्द किया।
  • 1989 से पुनर्बहाली तक का बकाया वेतन देने का निर्देश।
  • पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ भी देने होंगे।
  • छह सप्ताह के भीतर भुगतान करने का आदेश।
  • कहा- नियोक्ता अपनी गलती का फायदा नहीं उठा सकता।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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