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Jharkhand High Court: Facebook पर ‘Thank You Meri Jaan’ मैसेज से नहीं टूटेगी शादी, हाईकोर्ट ने पलटा तलाक का फैसला

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि Facebook पर 'Thank You Meri Jaan' मैसेज या सोशल मीडिया दोस्ती मात्र से अवैध संबंध साबित नहीं होते। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का तलाक आदेश रद्द कर विवाह बहाल किया।

Jharkhand High Court Divorce Judgment। क्या Facebook पर आया एक “Thank You Meri Jaan” मैसेज किसी शादी को खत्म कर सकता है? झारखंड हाईकोर्ट ने इस सवाल पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर भेजा गया एक संदेश या Facebook दोस्ती किसी महिला के अवैध संबंध का प्रमाण नहीं हो सकती।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसे गंभीर आरोपों के लिए ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य जरूरी हैं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने चाईबासा फैमिली कोर्ट का तलाक का आदेश रद्द करते हुए पति-पत्नी के विवाह को बहाल कर दिया।यह फैसला सोशल मीडिया, वैवाहिक विवाद और तलाक से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल माना जा रहा है।

एक Facebook मैसेज से शुरू हुआ पूरा विवाद

मामला चाईबासा के एक दंपती से जुड़ा है। पति ने फैमिली कोर्ट में आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी का एक फेसबुक मित्र से अवैध संबंध है। उसने अपने आरोप के समर्थन में “Thank You Meri Jaan” लिखा एक Facebook संदेश पेश किया। इसी आधार पर उसने पत्नी पर मानसिक क्रूरता और विवाहेतर संबंध के आरोप लगाए।फैमिली कोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक की अनुमति दे दी थी। इसके बाद पत्नी ने इस आदेश को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।

हाईकोर्ट ने कहा- सिर्फ मैसेज से नहीं लगाया जा सकता चरित्र पर दाग

जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस पी.के. श्रीवास्तव की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि महिला और उसके फेसबुक मित्र के बीच कभी मुलाकात हुई थी या दोनों के बीच ऐसा कोई संबंध था जिसे अवैध संबंध कहा जा सके।कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के चरित्र पर इस तरह का आरोप उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसलिए केवल संदेह, सोशल मीडिया चैट या एक संदेश के आधार पर ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पत्नी ने कहा- वह सिर्फ Facebook Friend था

सुनवाई के दौरान पत्नी ने अदालत को बताया कि संबंधित व्यक्ति उसका केवल फेसबुक मित्र था। उसने स्वीकार किया कि उस व्यक्ति ने एक बार “Thank You Meri Jaan” संदेश भेजा था, लेकिन उसने इस पर आपत्ति भी जताई थी। साथ ही उसने स्पष्ट किया कि उसकी उस व्यक्ति से कभी आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई।हाईकोर्ट ने माना कि केवल इस संदेश के आधार पर अवैध संबंध का निष्कर्ष निकालना न्यायसंगत नहीं है।

10-20 रुपये निकालने को भी नहीं माना क्रूरता

पति ने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसकी जेब से पैसे निकालती थी। पत्नी ने बताया कि उसने दो बार 10-20 रुपये घर की जरूरत का सामान खरीदने के लिए लिए थे, क्योंकि उसके पास पैसे नहीं थे।अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन में इस तरह की छोटी-छोटी घरेलू घटनाओं को क्रूरता नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने यह भी माना कि यह स्थिति पति द्वारा घरेलू खर्च के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं कराने की ओर संकेत करती है।

आरोपित व्यक्ति को सुने बिना नहीं दिया जा सकता फैसला

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति पर अवैध संबंध का आरोप लगाया गया, उसे मुकदमे में पक्षकार ही नहीं बनाया गया। ऐसे में उसका पक्ष सुने बिना उसके खिलाफ टिप्पणी करना न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना जा सकता।अदालत ने यह भी नोट किया कि जब पत्नी अपने पति के घर लौटी तो उसे घर में प्रवेश तक नहीं करने दिया गया।

पति नहीं कर सका क्रूरता साबित

खंडपीठ ने कहा कि पति अपनी पत्नी के खिलाफ लगाए गए क्रूरता और अवैध संबंध के आरोप साबित करने में असफल रहा। उल्टा, बिना पर्याप्त साक्ष्य पत्नी के चरित्र पर लगाए गए आरोप स्वयं मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आते हैं।इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का तलाक आदेश रद्द कर विवाह को बहाल करने का आदेश दिया।

इस फैसले का क्या मतलब है?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला स्पष्ट करता है कि सोशल मीडिया पर किसी संदेश या ऑनलाइन दोस्ती को अपने आप विवाहेतर संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत में ऐसे आरोपों को साबित करने के लिए ठोस, विश्वसनीय और स्वतंत्र साक्ष्य आवश्यक होंगे।

FAQ (SEO Boost)

क्या Facebook चैट से अवैध संबंध साबित हो सकता है?

नहीं। इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि केवल Facebook संदेश या दोस्ती पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।

हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला क्यों पलटा?

क्योंकि अवैध संबंध और क्रूरता के आरोपों के समर्थन में पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए थे।

क्या ‘Thank You Meri Jaan’ मैसेज को कोर्ट ने सबूत माना?

नहीं। अदालत ने कहा कि अकेला ऐसा संदेश विवाहेतर संबंध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।


अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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