JSSC परीक्षा विवाद: अब अध्यक्ष प्रशांत कुमार को हटाने की मांग हुई तेज, बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को लिखा पत्र, इन गतिविधियों पर उठाये सवाल…
JSSC Exam Controversy: Demands for the removal of Chairman Prashant Kumar have intensified; Babulal Marandi has written to CM Hemant Soren, raising questions about these activities...

रांची। JSSC-JPSC का विवाद फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं को लेकर छात्रों के आंदोलन के बीच अब JSSC के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार को हटाने की मांग तेज हो गई है। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मोर्चा खोला है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाने और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में परीक्षा सुधार समिति में प्रशांत कुमार को शामिल किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस अधिकारी के कार्यकाल से जुड़ी परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं, उन्हें ही परीक्षा प्रणाली में सुधार की जिम्मेदारी देना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से समिति की संरचना पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने का उठाया मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा सुधार समिति का गठन किया है। ऐसे में फरवरी 2024 में JSSC अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रशांत कुमार को उसी समिति में शामिल करना विरोधाभासी है।
उन्होंने पत्र में सितंबर 2024 की JSSC-CGL परीक्षा का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक यह परीक्षा प्रशांत कुमार के कार्यकाल में आयोजित हुई थी और बाद में विवादों के बीच इसे रद्द करना पड़ा। इसके साथ ही JSSC कार्यालय में छापेमारी और आयोग के सचिव से पूछताछ जैसी घटनाओं का भी हवाला दिया गया। मरांडी का कहना है कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी की भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, न कि उन्हें परीक्षा सुधार की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
प्रशांत कुमार की कार्यशैली पर भी सवाल
दरअसल बाबूलाल मरांडी ने अपने पत्र में प्रशांत कुमार की प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर भी कई आरोप लगाए हैं। उन्होंने वित्त सचिव के तौर पर राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर को लेकर सवाल उठाया है। बाबूलाल मरांडी ने जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि झारखंड हाई कोर्ट की ओर से अदालत को गुमराह करने और आदेश का पालन नहीं करने को लेकर जुर्माना लगाया गया था।
‘जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए, उसे सुधार की जिम्मेदारी क्यों?’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों का भरोसा बहाल करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए ऐसे अधिकारियों को समिति से दूर रखना जरूरी है, जिनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तत्काल हटाया जाए और उनकी भूमिका की स्वतंत्र जांच कराई जाए। मरांडी ने सरकार के इस फैसले की तुलना दूध की रखवाली बिल्ली को सौंपने से करते हुए निर्णय पर तीखी आपत्ति जताई।
छात्रों के आंदोलन के बीच बढ़ी सियासी गर्मी
JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों के बीच पहले से ही नाराजगी है। ऐसे समय में परीक्षा सुधार समिति की संरचना को लेकर नेता प्रतिपक्ष के सवालों ने विवाद को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब निगाहें सरकार के रुख पर हैं कि वह बाबूलाल मरांडी की मांग पर क्या कदम उठाती है।












