JSSC Teacher Exam: माध्यमिक आचार्य परीक्षा में कथित हैकिंग पर हाई कोर्ट सख्त, CID जांच के साथ FIR का आदेश
JSSC Teacher Exam: High Court takes a stern view of alleged hacking in the Madhyamik Acharya exam; orders FIR and CID probe.

रांची। झारखंड प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में कथित कंप्यूटर हैकिंग और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने पूरे मामले की स्वतंत्र आपराधिक जांच CID से कराने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य के मुख्य सचिव को तत्काल अज्ञात आरोपियों के खिलाफ CID में FIR दर्ज कराने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भर्ती के तहत होने वाली सभी नियुक्तियां CID जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी। यानी जांच में यदि किसी तरह की गंभीर गड़बड़ी या अनियमितता सामने आती है तो उसका सीधा असर भर्ती प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
मामला परीक्षा के दौरान इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर नंबर 28 और 19 में कथित तकनीकी गड़बड़ी और हैकिंग से जुड़ा है। हालांकि हाई कोर्ट ने जांच का दायरा केवल इन दो कंप्यूटरों तक सीमित नहीं रखा है। अदालत ने परीक्षा में इस्तेमाल किए गए सभी कंप्यूटरों और परीक्षा प्रक्रिया की जांच कराने का निर्देश दिया है।
15 जनवरी से 22 फरवरी 2026 के बीच हुई थी परीक्षा
झारखंड प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा का आयोजन 15 जनवरी से 22 फरवरी 2026 के बीच किया गया था। परीक्षा के दौरान कंप्यूटर नंबर 28 और 19 के कथित तौर पर हैक होने की शिकायत सामने आई थी।
मामला सामने आने के बाद झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने प्रभावित परीक्षा को दोबारा कराने का फैसला लिया था। आयोग के इस फैसले को अभ्यर्थियों की ओर से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी।याचिका में स्वतंत्र जांच कराने, निर्दोष अभ्यर्थियों का मूल परिणाम जारी करने और यदि किसी अभ्यर्थी, परीक्षा एजेंसी, अधिकारी या परीक्षा केंद्र की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
JSSC से हाई कोर्ट ने पूछे थे कई अहम सवाल
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश दीपक रोशन ने JSSC से कथित हैकिंग की जांच को लेकर कई गंभीर सवाल पूछे थे।अदालत ने जानना चाहा था कि कथित हैकिंग की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से क्यों नहीं कराई गई। केवल परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला क्यों लिया गया? कथित हैकिंग वाले परीक्षा केंद्रों पर क्या कार्रवाई की गई? और क्या गड़बड़ी केवल कुछ कंप्यूटर सिस्टम तक सीमित थी या पूरे परीक्षा केंद्र को प्रभावित किया गया था?इन सवालों पर JSSC की ओर से अदालत को संतोषजनक जवाब नहीं दिए जाने के बाद दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
केवल परीक्षा एजेंसी की रिपोर्ट पर भरोसा करना उचित नहीं
फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि केवल परीक्षा कराने वाली एजेंसी की रिपोर्ट पर भरोसा करना उचित नहीं है। अदालत ने कहा कि कोई भी संस्था अपने ही मामले में स्वयं न्यायाधीश नहीं बन सकती।कोर्ट के अनुसार, अब तक कथित तकनीकी गड़बड़ी की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से नहीं कराई गई थी। साथ ही Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2023 के तहत भी आपराधिक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी, जबकि कानून में इसकी व्यवस्था है।
कंप्यूटर नंबर 28 और 19 के साथ सभी सिस्टम की जांच
हाई कोर्ट ने CID जांच का दायरा व्यापक रखते हुए कहा है कि कंप्यूटर नंबर 28 और 19 की जांच के साथ-साथ उन सभी कंप्यूटरों की भी तकनीकी जांच की जाए, जिन पर माध्यमिक आचार्य परीक्षा आयोजित की गई थी।जांच में यह पता लगाया जाएगा कि परीक्षा के दौरान वास्तव में कंप्यूटर सिस्टम के साथ छेड़छाड़ या हैकिंग हुई थी या नहीं। साथ ही यह भी जांच होगी कि कथित तकनीकी गड़बड़ी केवल कुछ कंप्यूटरों तक सीमित थी या परीक्षा केंद्र अथवा अन्य सिस्टम भी इससे प्रभावित हुए थे।
मुख्य सचिव को FIR दर्ज कराने का निर्देश
हाई कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि कथित गड़बड़ी से जुड़े अज्ञात आरोपियों के खिलाफ CID में FIR दर्ज कराई जाए। इसके बाद CID मामले की आपराधिक जांच करेगी और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय करेगी।
नियुक्तियां CID जांच के अंतिम परिणाम के अधीन
अदालत ने भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। माध्यमिक आचार्य भर्ती के तहत की जाने वाली नियुक्तियां CID जांच के अंतिम परिणाम के अधीन रहेंगी।इसका मतलब है कि भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है, लेकिन नियुक्तियों की वैधता पर अंतिम स्थिति CID जांच के निष्कर्ष से प्रभावित हो सकती है। अब अभ्यर्थियों की नजर CID जांच और उसके बाद सामने आने वाली रिपोर्ट पर टिकी है।हाई कोर्ट के इस आदेश से JSSC की ओर से कराई गई पुनर्परीक्षा और कथित हैकिंग से जुड़े पूरे विवाद की स्वतंत्र जांच का रास्ता साफ हो गया है।












