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Perimenopause Symptoms: मेनोपॉज से पहले महिलाओं के शरीर में होते हैं ये बदलाव, जानिए पेरिमेनोपॉज के लक्षण और बचाव के तरीके

Perimenopause Symptoms in Hindi: मेनोपॉज से पहले पेरिमेनोपॉज क्या है? जानिए अनियमित पीरियड्स, हॉट फ्लैशेज, मूड स्विंग्स समेत इसके प्रमुख लक्षण और बचाव के तरीके।

Perimenopause Vs Menopause : महिलाओं के शरीर में कई अहम बदलाव होते है। समय के साथ महिलाओं और लड़कियों के शरीर में बदलाव होते रहे हैं। इसी बदलाव की कड़ी है पेरीमेनोपॉज व मेनोपॉज। महिलाओं में मेनोपॉज (Menopause) एक प्राकृतिक जैविक बदलाव है। आमतौर पर जब लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते हैं, तब मेनोपॉज माना जाता है। लेकिन मेनोपॉज अचानक नहीं होता।

इससे पहले महिलाओं को कई साल तक पेरिमेनोपॉज (Perimenopause) के दौर से गुजरना पड़ सकता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं, जिनका असर पीरियड्स, नींद, मूड और ऊर्जा के स्तर पर दिखाई दे सकता है।सीनियर मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. ऋचा भार्गव के मुताबिक, मेनोपॉज से पहले शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में उतार-चढ़ाव होने लगता है। इसी वजह से महिलाओं को कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक बदलाव महसूस हो सकते हैं।

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क्या है पेरिमेनोपॉज?

Perimenopause meaning in Hindi समझें तो यह मेनोपॉज से पहले की वह अवस्था है, जिसमें महिला का शरीर धीरे-धीरे पीरियड्स के स्थायी रूप से बंद होने की ओर बढ़ता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का प्राकृतिक चरण है।

पेरिमेनोपॉज के दौरान ओवरी से निकलने वाले हार्मोन का स्तर बदलता रहता है। इसके कारण पीरियड्स कभी जल्दी तो कभी देर से आ सकते हैं। कुछ महिलाओं में एक या दो महीने तक पीरियड्स नहीं आते, जबकि कभी ब्लीडिंग सामान्य से ज्यादा या कम हो सकती है।यह संक्रमणकाल कई महिलाओं में कुछ वर्षों तक रह सकता है। इस दौरान गर्भधारण की संभावना पूरी तरह समाप्त नहीं होती, क्योंकि कुछ महीनों में ओव्यूलेशन हो सकता है।

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पेरिमेनोपॉज के प्रमुख लक्षण क्या हैं?

हर महिला में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में हल्के बदलाव होते हैं, जबकि कुछ को रोजमर्रा के काम प्रभावित करने वाले लक्षण महसूस हो सकते हैं।
1. पीरियड्स में बदलाव
पेरिमेनोपॉज का सबसे आम संकेत मासिक धर्म चक्र में बदलाव है। पीरियड्स जल्दी या देर से आ सकते हैं और ब्लीडिंग का फ्लो भी बदल सकता है।
2. अचानक गर्मी महसूस होना
कई महिलाओं को अचानक शरीर में गर्मी महसूस होती है। इसे हॉट फ्लैशेज कहा जाता है। इसके साथ पसीना और बेचैनी भी हो सकती है।
3. रात में पसीना
सोते समय अचानक ज्यादा गर्मी लगना या पसीना आना नींद को प्रभावित कर सकता है।
4. नींद की समस्या
रात में बार-बार नींद खुलना, देर से नींद आना या सुबह उठने के बाद थकान महसूस होना भी पेरिमेनोपॉज के दौरान हो सकता है।
5. मूड में बदलाव
हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण चिड़चिड़ापन, बेचैनी, उदासी या मूड स्विंग्स महसूस हो सकते हैं।
6. थकान और ऊर्जा की कमी
पर्याप्त आराम के बावजूद लगातार थकान महसूस होना भी इस चरण से जुड़ा हो सकता है।
7. वजन और शरीर में बदलाव
उम्र, हार्मोनल बदलाव, जीवनशैली और मेटाबॉलिज्म में परिवर्तन के कारण वजन बढ़ने की समस्या हो सकती है।
8. त्वचा और बालों में बदलाव
कुछ महिलाओं में त्वचा का रूखापन या बालों के पतले होने जैसे बदलाव भी दिखाई दे सकते हैं।
9. योनि में सूखापन
एस्ट्रोजन के स्तर में बदलाव के कारण योनि में सूखापन या असहजता महसूस हो सकती है।

पेरिमेनोपॉज कितने साल तक रहता है?

पेरिमेनोपॉज की अवधि हर महिला में अलग होती है। कई महिलाओं में यह कुछ वर्षों तक चल सकता है। धीरे-धीरे पीरियड्स के बीच अंतर बढ़ता जाता है और अंत में लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आने पर मेनोपॉज माना जाता है।ध्यान देने वाली बात यह है कि एक-दो महीने पीरियड्स न आने का मतलब मेनोपॉज होना नहीं है। जब तक लगातार 12 महीने तक पीरियड्स नहीं आए हों, तब तक मेनोपॉज की पुष्टि नहीं मानी जाती।

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पेरिमेनोपॉज में क्या सावधानी रखें?

इस दौरान स्वस्थ जीवनशैली अपनाना काफी मददगार हो सकता है। भोजन में कैल्शियम और विटामिन-डी वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करें। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन लें।
नियमित शारीरिक गतिविधि और एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य रिलैक्सेशन तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है।
कैफीन, बहुत ज्यादा मीठे, मसालेदार और प्रोसेस्ड फूड कुछ महिलाओं में हॉट फ्लैशेज या नींद की समस्या को बढ़ा सकते हैं। यदि किसी खास खाद्य पदार्थ के बाद लक्षण बढ़ते हैं तो उसका सेवन कम करना बेहतर हो सकता है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

पेरिमेनोपॉज प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन हर तरह के बदलाव को केवल हार्मोनल बदलाव मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि पीरियड्स में बहुत ज्यादा या असामान्य ब्लीडिंग हो, लगातार दर्द रहे, लक्षण बहुत ज्यादा परेशान करें या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

निष्कर्ष
पेरिमेनोपॉज मेनोपॉज से पहले होने वाला प्राकृतिक बदलाव है, जिसके दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण पीरियड्स और स्वास्थ्य से जुड़े कई बदलाव दिखाई दे सकते हैं। इसके लक्षणों को समझना और समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना महिलाओं को इस बदलाव को बेहतर तरीके से समझने और संभालने में मदद कर सकता है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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