“हमारी भी सुनो हेमंत सरकार”..झारखंड में कनीय अभियंताओं का 12 महीने से वेतन बकाया! नगर विकास विभाग पर उठे सवाल, हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला.. कब जागेगा विभाग
झारखंड में कनीय अभियंताओं का 12 महीने से वेतन बकाया? UDHD पर उठे सवाल

JHARKHAND NEWS: राज्य में कनीय अभियंता पूरे साल भर से भूखे हैं, दुर्गा पूजा जैसे त्यौहार में भी वेतन नहीं मिल पाया मसलन अब सरकार से पूछ रहे हैं कि…”वेतन नहीं, तो परिवार कैसे चलेगा?” झारखंड के नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) के अंतर्गत विभिन्न नगर निकायों में कार्यरत कनीय अभियंताओं ने अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अभियंताओं का दावा है कि पिछले 11–12 महीनों से वेतन भुगतान की गंभीर समस्या बनी हुई है। वेतन के अभाव में मकान का किराया, बच्चों की पढ़ाई और परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है। वहीं, बायोमेट्रिक उपस्थिति की श्रेणी, सेवा संवर्ग और सरकारी सुविधाओं को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
वेतन संकट से जूझ रहे कनीय अभियंता, परिवार चलाना मुश्किल
कनीय अभियंताओं के अनुसार, वे झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की JDLCCE प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से नियमित रिक्तियों के विरुद्ध चयनित हुए थे। इसके बावजूद वेतन भुगतान से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अभियंताओं का कहना है कि करीब एक साल तक वेतन नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है। कार्यालय आने-जाने का खर्च उठाना और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी चुनौती बन गया है।
बायोमेट्रिक उपस्थिति में Contractual श्रेणी, नियुक्ति पर सवाल
अभियंताओं ने बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से चयनित होने के बावजूद उन्हें बायोमेट्रिक प्रणाली में Contractual/Other श्रेणी के तहत उपस्थिति दर्ज करनी पड़ रही है। अभियंताओं के मुताबिक, इस स्थिति के कारण उनकी सेवा स्थिति को लेकर भ्रम पैदा हो रहा है और वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने संबंधित विभाग से इस मामले में स्पष्ट लिखित दिशा-निर्देश जारी करने और तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने की मांग की है।
सेवा संवर्ग और नियमों को लेकर भी दुविधा
कनीय अभियंताओं की एक प्रमुख मांग स्पष्ट इंजीनियरिंग सेवा संवर्ग और सेवा नियम लागू करने की है। उनका कहना है कि JSSC की एक ही भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से RCD, WRD, DWSD, ऊर्जा विभाग और UDHD के लिए कनीय अभियंताओं का चयन हुआ था। इसके बावजूद UDHD में कार्यरत अभियंताओं को अपने सेवा संवर्ग और सेवा शर्तों को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
अभियंताओं ने GPF/NPS और अन्य सरकारी सेवा सुविधाओं को लेकर भी स्पष्टता की मांग की है। उनका कहना है कि लागू नियमों के अनुरूप उन्हें उचित सेवा लाभ मिलना चाहिए।
झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा मामला, W.P.(S) No. 1115/2025
अपनी सेवा संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए कनीय अभियंताओं ने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। उनके अनुसार, इस संबंध में W.P.(S) No. 1115/2025 मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अभियंता न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं और चाहते हैं कि विभागीय स्तर पर भी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
स्ट्रीट लाइट और तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी, फिर भी वेतन का संकट
नगर निकायों में कार्यरत ये कनीय अभियंता स्ट्रीट लाइट, विद्युत व्यवस्था और अन्य जनहित से जुड़े तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी निभाते हैं। अभियंताओं का कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं, लेकिन वेतन भुगतान में देरी के कारण उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है।
सरकार और विभाग से ये हैं मांगें?
कनीय अभियंताओं ने राज्य सरकार और नगर विकास एवं आवास विभाग से मुख्य रूप से चार मांगें रखी हैं:
1. लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
2. बायोमेट्रिक उपस्थिति की श्रेणी और वेतन भुगतान से जुड़ी समस्याओं का समाधान किया जाए।
3. स्पष्ट इंजीनियरिंग सेवा संवर्ग और सेवा नियम निर्धारित किए जाएं।
4. GPF/NPS समेत अन्य सेवा सुविधाओं पर लागू नियमों के अनुसार स्थिति स्पष्ट की जाए।
अब सवाल बेहद अहम है कि करीब एक साल से वेतन भुगतान की समस्या का सामना कर रहे इन अभियंताओं को राहत कब मिलेगी? मामले में संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी जरूरी है। विभाग की ओर से वेतन भुगतान में देरी के कारणों, बायोमेट्रिक श्रेणी और सेवा नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर सामने आ सकेगी।












