Jharkhand News: 19 जिलों के DEO पर गिर सकती है गाज, जानिये शिक्षा विभाग क्यों अधिकारियों पर हुआ सख्त, सिर्फ 5 जिलों ने ही शासन का आदेश माना..
झारखंड में वित्त रहित स्कूल-कॉलेजों के अनुदान भुगतान में देरी पर शिक्षा विभाग सख्त है। 19 जिलों के DEO को तीन दिन में भुगतान का निर्देश, लापरवाही पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी।

Jharkhand News: 19 जिलों के DEO पर गिर सकती है गाज, अनुदान भुगतान में देरी पर शिक्षा विभाग सख्त
रांची: झारखंड में जिला शिक्षा अधिकारियों पर गाज गिरने वाली है। आदेश की अनदेखी मामले में बड़े एक्शन की तैयारी है। 19 जिलों के डीईओ पर गाज गीर सकती है। वित्त रहित स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को अनुदान देने में लापरवाही बरतने वाले जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश के बावजूद राज्य के 19 जिलों में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत अनुदान राशि अब तक संबंधित संस्थानों के खाते में हस्तांतरित नहीं की गई है।मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद ने संबंधित जिलों के DEO को पत्र भेजकर नाराजगी जताई है। साथ ही, तीन दिनों के भीतर अनुदान की राशि वितरित करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश का अनुपालन नहीं होने पर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।विभागीय निर्देश के बाद अब संबंधित जिलों के अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है। हालांकि, फिलहाल कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होने की पुष्टि नहीं हुई है।
15 अक्टूबर तक भुगतान का था निर्देश, फिर भी क्यों अटकी राशि?
विभागीय जानकारी के अनुसार, अपील आवेदन के आधार पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए विभागीय अनुदान समिति ने जिन संस्थानों के अनुदान को मंजूरी दी थी, उनकी राशि 6 अक्टूबर को ही जिलों को उपलब्ध करा दी गई थी।इसके बाद जिला शिक्षा पदाधिकारियों को 15 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से संबंधित संस्थानों के खाते में राशि हस्तांतरित करने का निर्देश दिया गया था।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया था कि भुगतान में किसी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।इसके बावजूद निर्धारित समयसीमा बीतने के बाद भी अधिकांश जिलों में भुगतान नहीं हो सका। इसी को विभागीय आदेश की अवहेलना मानते हुए अब संबंधित अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
सिर्फ 5 जिलों ने किया भुगतान, 19 जिलों में अब भी इंतजार
विभाग को मिली जानकारी के अनुसार, राज्य के केवल पांच जिलों ने स्वीकृत अनुदान की राशि संबंधित शैक्षणिक संस्थानों को हस्तांतरित की है।
इन जिलों में शामिल हैं:
• रामगढ़
• हजारीबाग
• सिमडेगा
• धनबाद
• पूर्वी सिंहभूम
वहीं, शेष 19 जिलों में अनुदान राशि का भुगतान लंबित बताया गया है। शिक्षा विभाग ने इन जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को जल्द से जल्द भुगतान पूरा करने का निर्देश दिया है।यहां सबसे अहम सवाल यह है कि जब राशि 6 अक्टूबर को ही जिलों को उपलब्ध करा दी गई थी और भुगतान की अंतिम समयसीमा 15 अक्टूबर निर्धारित थी, तो इसके बावजूद बाकी जिलों में भुगतान क्यों नहीं हुआ?
तीन दिन का अल्टीमेटम, अनुपालन नहीं हुआ तो अनुशासनिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने संबंधित 19 जिलों के DEO को तीन दिनों के भीतर अनुदान राशि वितरित करने का निर्देश दिया है।निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान समय पर अनुदान राशि प्राप्त कर सकें और उपयोगिता प्रमाणपत्र के साथ वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन कर सकें।विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आदेश का अनुपालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
इस निर्देश के बाद अब संबंधित जिलों में भुगतान की प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही पर नजर रहेगी। हालांकि, कार्रवाई का अंतिम फैसला अनुपालन की स्थिति और विभागीय प्रक्रिया के अनुसार होगा।
वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा ने भी उठाया था मामला
बुधवार को वित्त रहित शिक्षा संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षा विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह के समक्ष अनुदान भुगतान में हो रही देरी का मुद्दा उठाया था। मोर्चा ने बताया था कि कई जिलों में स्वीकृत राशि मिलने के बावजूद संबंधित संस्थानों को भुगतान नहीं किया गया है।
मोर्चा ने वित्त रहित शैक्षणिक संस्थानों के अनुदान में 75 प्रतिशत वृद्धि करने और इन संस्थानों की छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का लाभ देने की मांग पर भी जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया।विधानसभा में सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन का हवाला देते हुए मोर्चा ने मांगों को लागू करने की बात कही। इस पर विभागीय सचिव ने आश्वासन दिया कि सरकार ने जो वादा किया है, उसे पूरा किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए कुछ नीतिगत निर्णय लेने होंगे।












