झारखंड : रजाई-स्वैटर निकाल लीजिये, चार नवंबर से कड़ाके की ठंड होगी शुरू, मौसम विभाग ने चक्रवात के बाद जारी किया अलर्ट
झारखंड में मौसम बदलने के साथ ठंड बढ़ने की संभावना है। 4 नवंबर 2026 के बाद न्यूनतम तापमान गिर सकता है। जानें चक्रवातीय तूफान, अल-नीनो और सर्दी को लेकर मौसम वैज्ञानिक ने क्या कहा।

Jharkhand Weather News: झारखंड में बदलने वाला है मौसम, 4 नवंबर के बाद बढ़ेगी ठंड!
रांची: अर्नब चक्रवात के बाद अब ठंडक की दस्तक शुरू हो जायेगी। झारखंड में मौसम का मिजाज बदलने जा रहा है। झारखंड में मौसम में बदलाव के साथ ही आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने की संभावना जताई गई है। चक्रवातीय तूफान अर्नब के प्रभाव से राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहने के कारण न्यूनतम तापमान में फिलहाल अपेक्षित गिरावट नहीं हो रही है। हालांकि, दिन के तापमान में पहले ही 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मौसम विज्ञान विभाग के रांची केंद्र के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, चक्रवातीय तूफान का सिस्टम समाप्त होने और आसमान साफ होने के बाद झारखंड में रात के तापमान में गिरावट आ सकती है। उनके मुताबिक, 4 नवंबर 2026 के बाद न्यूनतम तापमान गिरने और ठंड बढ़ने की संभावना है।
वहीं, दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक राज्य में सर्दी का असर अधिक रहने की संभावना जताई जाती है। हालांकि, इस बार अल-नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर भी चर्चा है, जिससे ठंड की तीव्रता प्रभावित हो सकती है।
बादल छाए रहने से रात में क्यों नहीं बढ़ रही ठंड?
झारखंड के कई हिस्सों में फिलहाल बादलों की मौजूदगी के कारण रात के तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार, बादल रात के दौरान पृथ्वी से निकलने वाली ऊष्मा को बाहर जाने से रोकते हैं। इससे न्यूनतम तापमान में अपेक्षित गिरावट नहीं हो पाती।
दूसरी ओर, दिन के तापमान में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने से मौसम में बदलाव महसूस किया जा रहा है।आमतौर पर आसमान साफ होने पर रात में पृथ्वी की सतह तेजी से गर्मी खोती है। इससे न्यूनतम तापमान नीचे जाने लगता है और सुबह तथा देर रात ठंड का एहसास बढ़ जाता है।
4 नवंबर के बाद कैसा रहेगा झारखंड का मौसम?
मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, चक्रवातीय तूफान अर्नब का सिस्टम समाप्त होने के बाद राज्य के मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। 4 नवंबर के बाद आसमान साफ होने पर न्यूनतम तापमान में गिरावट की संभावना है।
इस बदलाव का असर सुबह और रात के समय अधिक महसूस हो सकता है। ऐसे में लोगों को आने वाले दिनों में हल्के गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस होने लग सकती है।हालांकि, तापमान में कितनी गिरावट होगी और किन जिलों में ठंड का असर पहले बढ़ेगा, इसका आकलन ताजा मौसम पूर्वानुमान के आधार पर ही किया जा सकता है।
15 दिसंबर से 15 जनवरी तक रहती है सबसे ज्यादा ठंड
झारखंड में सामान्य तौर पर 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच सर्दी का असर अधिक महसूस किया जाता है। इस अवधि में रात का तापमान कम रहने के साथ सुबह और देर रात ठंड बढ़ सकती है।इस साल अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए ठंड की तीव्रता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, केवल अल-नीनो के आधार पर यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि झारखंड में इस बार सर्दी पिछले वर्षों की तुलना में कम ही पड़ेगी। इसके लिए मौसमी परिस्थितियों और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
क्या है अल-नीनो और झारखंड की ठंड पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
अल-नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह के तापमान में सामान्य से अधिक गर्मी आने से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका असर दुनिया के कई क्षेत्रों के मौसम के पैटर्न पर पड़ सकता है।
भारत में अल-नीनो का संबंध मानसून की परिस्थितियों से भी जोड़ा जाता है, लेकिन किसी विशेष राज्य में सर्दी कितनी पड़ेगी, इसका निर्धारण कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
इसलिए झारखंड में इस साल ठंड कम पड़ेगी या ज्यादा, इसका अंतिम आकलन करने के लिए तापमान के रुझान, पश्चिमी विक्षोभ, हवा की दिशा और अन्य मौसमी प्रणालियों की निगरानी जरूरी होगी।
सुबह और रात में बढ़ सकती है ठंड, रहें सतर्क
आने वाले दिनों में न्यूनतम तापमान में गिरावट होने पर सुबह और रात के समय ठंड का असर बढ़ सकता है। मौसम में बदलाव के दौरान लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:
• सुबह और देर रात बाहर निकलते समय जरूरत के अनुसार गर्म कपड़े पहनें।
• बच्चों और बुजुर्गों को तापमान में अचानक बदलाव से बचाने का ध्यान रखें।
• मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान और स्थानीय चेतावनियों पर नजर रखें।
झारखंड में फिलहाल बादलों के कारण रात के तापमान में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जबकि दिन के तापमान में गिरावट दर्ज किए जाने की जानकारी है। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, 4 नवंबर 2026 के बाद आसमान साफ होने पर न्यूनतम तापमान में गिरावट आ सकती है।दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक ठंड का असर अधिक रहने की संभावना है। वहीं, अल-नीनो के संभावित प्रभाव को लेकर अंतिम निष्कर्ष के लिए आने वाले दिनों के मौसम पूर्वानुमानों पर नजर रखना जरूरी होगा।












