Kali Puja 2026: काली पूजा इस बार दिवाली के एक दिन पहले तो नहीं? झारखंड-बिहार में काली पूजा की तारीख को लेकर क्यों है कंफ्यूजन? 7 या 8 नवंबर, जानिए काली चौदस का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Kali Chaudas 2026 कब है? झारखंड और बिहार में काली पूजा 7 या 8 नवंबर को होगी? जानें काली चौदस की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

Kali Puja 2026। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही बंगाल के साथ झारखंड और बिहार में मां काली की पूजा को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। झारखंड के कई जगहों पर मां काली की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। लेकिन इस साल काली पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कहीं 7 नवंबर को काली चौदस और मां काली की पूजा की तैयारी है, तो कहीं 8 नवंबर को दीपावली के साथ ही काली पूजा मनाने की योजना है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि आखिर मां काली की पूजा 7 नवंबर को होगी या 8 नवंबर को? क्या इस बार काली पूजा दीपावली से एक दिन पहले होगी?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में काली चौदस का पर्व 7 नवंबर, शनिवार को मनाया जाएगा। इसका मुख्य कारण यह है कि इस दिन मध्यरात्रि के महानिशीथ काल में चतुर्दशी तिथि मौजूद रहेगी। हालांकि, दीपावली की अमावस्या तिथि पर होने वाली काली पूजा की परंपरा अलग है। इसी अंतर के कारण झारखंड और बिहार में पूजा की तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है।
7 नवंबर को मनाई जाएगी काली चौदस 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 47 मिनट से शुरू होगी और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी।काली चौदस की तारीख निर्धारित करने में मध्यरात्रि यानी महानिशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है। इस वर्ष 7 नवंबर की रात महानिशीथ काल में चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी। इसलिए काली चौदस 7 नवंबर को मनाई जाएगी।
काली चौदस और काली पूजा में क्या है अंतर?
काली चौदस और दीपावली की काली पूजा को लेकर अक्सर लोगों में भ्रम रहता है। दरअसल, दोनों का धार्मिक महत्व मां काली की आराधना से जुड़ा है, लेकिन इनकी तिथि और पूजा परंपरा अलग हो सकती है।
• काली चौदस: कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन मां काली और देवी कालरात्रि की आराधना की जाती है।
• दीपावली की काली पूजा: कार्तिक अमावस्या की रात मां काली की विशेष पूजा की जाती है। पश्चिम बंगाल समेत कई क्षेत्रों में इस दिन काली पूजा का विशेष आयोजन होता है।
यही वजह है कि कुछ स्थानों पर 7 नवंबर को काली चौदस के अवसर पर मां काली की पूजा होगी, जबकि कई मंदिरों और पूजा समितियों में 8 नवंबर को दीपावली की अमावस्या पर काली पूजा आयोजित की जाएगी।
झारखंड और बिहार में क्यों है तारीख को लेकर असमंजस?
झारखंड और बिहार में मां काली की पूजा की अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराएं प्रचलित हैं। कई स्थानों पर काली चौदस के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, जबकि बंगाली समुदाय और काली पूजा समितियां अमावस्या की मध्यरात्रि को मां काली की आराधना करती हैं।
इस वर्ष चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को शुरू होकर 8 नवंबर की सुबह तक रहेगी। वहीं अमावस्या की पूजा का समय अलग पंचांग गणना के अनुसार निर्धारित होगा। ऐसे में कुछ जगहों पर 7 नवंबर और कुछ जगहों पर 8 नवंबर को पूजा की तैयारियां की जा रही हैं।
इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय मंदिर, पूजा समिति और क्षेत्रीय पंचांग के अनुसार पूजा की तारीख की पुष्टि करनी चाहिए।
Kali Chaudas 2026: पूजा का शुभ मुहूर्त
धार्मिक पंचांग में काली चौदस की रात्रिकालीन पूजा के लिए महानिशीथ काल को विशेष महत्व दिया गया है।
विवरण तारीख और समय
काली चौदस 7 नवंबर 2026, शनिवार
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ 7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त 8 नवंबर, सुबह 11:27 बजे
पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:39 बजे से 12:31 बजे तक
पूजा की अवधि लगभग 52 मिनट
काली चौदस क्यों मनाई जाती है?
काली चौदस को भूत चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह पर्व बुरी शक्तियों और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा का प्रतीक है।मां काली को शक्ति, साहस और दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन उनकी आराधना करने से भय, संकट और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
मां काली की पूजा कैसे करें?
काली चौदस पर मां काली की पूजा विशेष रूप से रात्रि में की जाती है। सामान्य श्रद्धालु घर या मंदिर में अपनी परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
1. स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां काली का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
2. दीपक जलाएं: रात्रि में पूजा के समय मां काली की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
3. पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें: मां को पुष्प, धूप और अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करें।
4. मंत्र जाप करें: मां काली के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
5. आरती करें: पूजा के अंत में मां काली की आरती करें।
क्या इस बार दिवाली से एक दिन पहले होगी काली पूजा?
इस सवाल का जवाब समझने के लिए काली चौदस और अमावस्या की काली पूजा का अंतर समझना जरूरी है। 7 नवंबर को चतुर्दशी के कारण काली चौदस मनाई जाएगी, जबकि दीपावली की काली पूजा अमावस्या तिथि और उसके निशीथ काल के अनुसार निर्धारित होगी।इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे झारखंड और बिहार में काली पूजा केवल 7 नवंबर को ही होगी। कई स्थानों पर 8 नवंबर को दीपावली के साथ मां काली की पूजा की जाएगी।












