झारखंड: “क्या मुसलमान होना इस देश में अपराध है महोदया” मंत्री इरफान अंसारी ने लिख दिया सीधे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र, देखें पत्र क्या लिखा है…
Jharkhand: "Madam, is being a Muslim a crime in this country?" Minister Irfan Ansari wrote a letter directly to President Draupadi Murmu.

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है। पत्र में अल्पसंख्यकों एवं उलेमाओं के कथित अपमान और हिंसा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की गई है।
रांची/नई दिल्ली/22.2.26। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu को तीन पन्नों का पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मंत्री ने पत्र में आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुस्लिम समुदाय और उलेमाओं के साथ अपमान एवं हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं, जो संवैधानिक मूल्यों के प्रतिकूल हैं।
पत्र में स्वास्थ्य मंत्री ने लिखा कि बचपन से संविधान की जिस भावना — समानता, न्याय और धर्मनिरपेक्षता — को समझा गया, वर्तमान परिस्थितियों में वह भावना आहत होती दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश से लगातार ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं, जिनमें धार्मिक आधार पर कथित भेदभाव, सार्वजनिक अपमान और मारपीट के मामले देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रपति से सवाल पूछा है कि, क्या इस देश में मुसलमान होना अपराध बनता जा रहा है? क्या “सबका साथ, सबका विकास” केवल एक राजनीतिक नारा रह गया है?
मंत्री ने हाल ही में वायरल एक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें कथित रूप से एक व्यक्ति द्वारा धार्मिक आधार पर अमानवीय व्यवहार का दृश्य दिखाई देता है, जो सामाजिक सौहार्द और कानून के शासन के लिए चिंताजनक है। हालांकि, उन्होंने राष्ट्रपति को यह भी संकेत दिया कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई आवश्यक है। रमजान जैसे पवित्र महीने में भी यदि मुसलमान स्वयं को असुरक्षित महसूस करें, तो यह केवल एक समुदाय का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा पर लगा घाव है। मध्यप्रदेश, असम, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों से भी अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने राष्ट्रपति को अपने पत्र में उत्तर प्रदेश की Yogi Adityanath के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य में पीड़ितों को न्याय का भरोसा न मिले और अल्पसंख्यक समुदाय में भय का वातावरण बने, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।
पत्र में मंत्री ने राष्ट्रपति से तीन प्रमुख मांगें रखीं —
1. उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर तत्काल संज्ञान लिया जाए।
2. राज्य सरकार से विस्तृत एवं सार्वजनिक रिपोर्ट तलब की जाए।
3. यदि संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन पाया जाए, तो कठोर संवैधानिक कदमों पर विचार किया जाए, जिसमें राष्ट्रपति शासन लगाने का विकल्प भी शामिल हो।
मंत्री ने पत्र में यह भी कहा कि यह किसी राजनीतिक दल विशेष का विरोध नहीं, बल्कि संविधान और समानता के सिद्धांतों की रक्षा का विषय है। उन्होंने देश में शांति, सद्भाव और न्याय की पुनर्स्थापना के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति शासन जैसे कदमों पर निर्णय संविधान में निर्धारित प्रक्रियाओं और ठोस तथ्यों के आधार पर ही लिया जाता है।
यहां देखें राष्ट्रपति को लिखा पत्र…












