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झारखंड हाईकोर्ट सख्त: पेंशन भुगतान में देरी पर नाराजगी, आदेश नहीं मानने पर प्रधान सचिव का वेतन रोकने की चेतावनी

Jharkhand High Court Takes Strict Stance: Expresses Displeasure Over Delayed Pension Payments; Warns of Withholding Principal Secretary's Salary for Non-Compliance

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रिटायर कर्मचारियों के पेंशन भुगतान में हो रही देरी और आदेशों की अवहेलना पर कड़ी नाराजगी जताई है। Justice Deepak Roshan की अदालत ने नगर विकास विभाग को अंतिम मौका देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर कोर्ट के आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो विभाग के प्रधान सचिव का वेतन स्वतः रोक दिया जाएगा।

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने 20 मार्च को दिए गए अपने पूर्व आदेश का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि पिछली सुनवाई में भी विभाग को पर्याप्त समय दिया गया था और यह स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि अगली तिथि तक आदेश का अनुपालन नहीं होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा, जिससे अदालत ने सख्त रुख अपनाया है।

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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल चार अधिकारियों के वेतन पर लगाई गई रोक जारी रहेगी। इनमें उपायुक्त रामगढ़ चंदन कुमार, उपायुक्त हजारीबाग नैंसी सहाय, कार्यपालक पदाधिकारी हजारीबाग जोगेंद्र प्रसाद और कार्यपालक पदाधिकारी रामगढ़ मनीष कुमार शामिल हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार ये अधिकारी बिना न्यायालय की अनुमति के अपना वेतन नहीं निकाल सकेंगे।

मामला माइंस बोर्ड हजारीबाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों रवींद्र नाथ और अन्य द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का अब तक पालन नहीं किया गया है। उस आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि संबंधित सेवानिवृत्त कर्मियों को नियमित पेंशन दी जाए, साथ ही छठे और सातवें वेतन आयोग के अनुसार संशोधित लाभ और बकाया राशि 12 सप्ताह के भीतर भुगतान की जाए।

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अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी टिप्पणी की कि सरकार ने आदेश का पालन करने के बजाय अपील दाखिल कर देरी को उचित ठहराने की कोशिश की, जो न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है। कोर्ट ने हाल ही में Supreme Court of India के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि विलंब से अपील दाखिल कर न्यायिक आदेशों को टालना न्याय व्यवस्था को कमजोर करता है और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।

हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से साफ संकेत मिल रहा है कि न्यायालय अपने आदेशों के पालन को लेकर अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा।

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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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