VIDEO: …जब ITBP जवानों ने पुलिस कमिश्नरेट घेरा: 40-50 जवान हथियार लेकर पहुंचे, पुलिसवाले पीछे हटे, जानिये किस बात से नाराज थे आईटीबीपी के जवान, ये है पूरा मामला
VIDEO: ...When ITBP soldiers surrounded the Police Commissionerate: 40-50 soldiers arrived with weapons, the policemen retreated. Find out what the ITBP soldiers were angry about; this is the whole story.

कानपुर/23.5.26। ITBP जवान की मां का हाथ काटे जाने के मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज आईटीबीपी जवानों का गुस्सा शनिवार को खुलकर सामने आ गया। 32वीं बटालियन के 50 से ज्यादा हथियारबंद जवान अचानक कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। जवानों की भारी मौजूदगी से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाद में पुलिस अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग और आईटीबीपी अफसरों के बीच लंबी बातचीत के बाद मामला शांत हुआ।
कानपुर में ITBP के 40-50 हथियारबंद जवानों ने पुलिस कमिश्नरेट को घेर लिया। सभी साथी जवान की शिकायत पर कार्रवाई न होने से नाराज थे। ITBP जवान पूरे परिसर में जगह-जगह खड़े हो गए। वर्दी में हथियार से लैस होकर पहुंचे जवानों को देखकर पुलिसवाले पीछे हट गए। करीब एक घंटे तक परिसर में माहौल तनावपूर्ण रहा।
दरअसल ये पूरा मामला महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी से जुड़ा है। परिजनों के मुताबिक 13 मई को सांस लेने में दिक्कत होने पर उन्हें टाटमिल चौराहे स्थित कृष्णा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि इलाज के दौरान गंभीर लापरवाही के कारण उनके हाथ में संक्रमण फैल गया।
#कानपुर CP ऑफिस के बाहर ITBP का फॉर्मेशन… और कमांडेंट गौरव प्रसाद की एंट्री!
पूरा नज़ारा किसी ऑपरेशन मोड से कम नहीं दिखा। 40-50 जवान, सख्त सिक्योरिटी फॉर्मेशन और सीधे कमिश्नरेट पहुंचकर नाराज़गी का संदेश।#Kanpur #ITBP #KanpurPolice https://t.co/IlSnPnE2sf pic.twitter.com/K53xCHuPWq
— ऋषभ वीरेन्द्र दीक्षित (@RishabhDixit57) May 23, 2026
संक्रमण बढ़ा, हाथ काटना पड़ा
जवान का दावा था कि उनकी मां को सांस की प्राब्लम था, उनके हाथ में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन डाक्टरों ने उनकी मां का हाथ काट दिया। हालांकि दावा ये है कि डॉक्टरों ने संक्रमण गंभीर होने की वजह से 17 मई को उनका हाथ काट दिया।इस घटना के बाद परिवार ने कृष्णा अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग शुरू कर दी। कांस्टेबल विकास सिंह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे और अस्पताल प्रबंधन पर मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाते रहे।
मां का कटा हाथ लेकर पहुंचे थे पुलिस कमिश्नर ऑफिस
मामला उस समय और चर्चा में आ गया जब 20 मई को आईटीबीपी जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने अस्पताल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग और सीएमओ कार्यालय को सौंप दी थी। जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दी, लेकिन रिपोर्ट में संक्रमण फैलने की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई। साथ ही किसी के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं की गई।
जांच रिपोर्ट से नाराज हुए जवान
जांच रिपोर्ट से पीड़ित परिवार और आईटीबीपी अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए। उनका आरोप है कि रिपोर्ट में केवल संभावनाओं का उल्लेख किया गया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि संक्रमण आखिर फैला कैसे और मरीज की हालत इतनी गंभीर क्यों हुई।आईटीबीपी अधिकारियों ने जांच टीम पर अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों को बचाने का आरोप लगाया। इसी नाराजगी के बीच शनिवार सुबह आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद, लाइजनिंग अफसर अर्पित और करीब 50 जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए।
ITBP जवान विकास सिंह 3 दिन तक FIR दर्ज कराने के लिए भटकते रहे लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई।
फिर वो अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल बॉक्स में लेकर कानपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंच गए..!
pic.twitter.com/anLvecH862— मिच्च मसाला (@micchamasala) May 23, 2026
पुलिस कमिश्नर कार्यालय बना छावनी
वर्दी में हथियारों से लैस जवानों की बड़ी संख्या में मौजूदगी से पुलिस कमिश्नर परिसर छावनी में तब्दील हो गया। जवान अलग-अलग जगहों पर खड़े हो गए, जिससे वहां मौजूद पुलिसकर्मी भी सतर्क हो गए।करीब एक घंटे तक चली बैठक में आईटीबीपी अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था डॉ. विपिन ताडा के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
दोबारा जांच के निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं। अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित पक्ष जांच रिपोर्ट के कई बिंदुओं से असहमत था, इसलिए दोबारा जांच कराई जाएगी।उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन या अन्य व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।









