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झारखंड : जूनियर अफसरों को अब नहीं मिलेगा सीनियर पदों का चार्ज, वित्त विभाग ने जारी किया सख्त निर्देश, जानिये सरकार को क्यों लेना पड़ा ये फैसला

Jharkhand: Junior officers will no longer be given charge of senior positions; the Finance Department has issued strict instructions. Find out why the government had to take this decision.

रांची/27.5.26। झारखंड सरकार ने जूनियरों को सीनियर पदों पर चार्ज दिये जाने के मुद्दे पर बड़ा फैसलालिया है। सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा और नीतिगत बदलाव करते हुए जूनियर अधिकारियों को सीनियर पदों का स्वतंत्र चालू प्रभार देने की वर्षों पुरानी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है। राज्य के वित्त विभाग ने इस संबंध में सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।

सरकार का कहना है कि इस अस्थायी व्यवस्था के कारण लगातार कानूनी विवाद उत्पन्न हो रहे थे और राज्य सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ बढ़ता जा रहा था।वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि निम्नतर वेतनमान वाले अधिकारियों को उच्चतर पदों का स्वतंत्र प्रभार देने का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान झारखंड सेवा संहिता में मौजूद नहीं है। इसके बावजूद वर्षों से विभिन्न विभागों में यह व्यवस्था लागू थी, जिसके कारण कई प्रशासनिक और वित्तीय जटिलताएं सामने आने लगी थीं।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे थे मामले

वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया कि पूर्व में कई विभागों में छोटे वेतनमान वाले अधिकारियों को बड़े और महत्वपूर्ण पदों का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया था। बाद में जब इन अधिकारियों का प्रभार समाप्त हुआ, तो उन्होंने उच्चतर पद के वेतन और अपने मूल वेतन के बीच के अंतर की राशि यानी एरियर भुगतान की मांग शुरू कर दी।

इस मुद्दे को लेकर कई अधिकारियों ने झारखंड हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया तक में याचिकाएं दायर कीं। कुछ मामलों में सर्वोच्च अदालत ने अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद राज्य सरकार को अतिरिक्त वित्तीय भुगतान करना पड़ा। सरकार का मानना है कि इस तरह की व्यवस्थाओं ने सरकारी खजाने पर भारी आर्थिक दबाव डाला और प्रशासनिक असंतुलन भी पैदा किया।

 

मुख्यमंत्री स्तर से मिले निर्देश के बाद लिया गया फैसला
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्तर पर इस पूरे मामले की समीक्षा की गई थी। इसके बाद वित्त विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि नियम-विरुद्ध व्यवस्थाओं को समाप्त किया जाए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सेवा नियमों के अनुरूप संचालित किया जाए। इसी के तहत अब जूनियर अधिकारियों को सीनियर पदों का स्वतंत्र चालू प्रभार देने की व्यवस्था पूरी तरह खत्म कर दी गई है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पद पर नियुक्ति और प्रभार केवल विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत ही हो।

विशेष परिस्थितियों में सीमित अवधि के लिए मिलेगा अतिरिक्त प्रभार

हालांकि सरकार ने अपने नए निर्देश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी अत्यंत विशेष परिस्थिति या प्रशासनिक आवश्यकता के कारण किसी वरिष्ठ पद का प्रभार देना जरूरी हो, तो वह केवल सीमित अवधि के लिए ही दिया जा सकेगा। इसके लिए भी झारखंड सेवा संहिता के नियम-103 के तहत सक्षम प्राधिकार से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारी अपने मूल पद की जिम्मेदारियों के साथ अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे, लेकिन उन्हें स्वतंत्र रूप से उस पद का संचालन करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही संबंधित विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्धारित सीमित अवधि के भीतर उस पद पर नियमित और स्थायी नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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