झारखंड-अजब विभाग की गजब कहानी: घूसखोर अफसरों को सस्पेंड करना भूल गया विभाग, डेढ़ महीने बाद बेल मिलने पर ख्याल आया सस्पेंशन का, दो निलंबित
Jharkhand—The Bizarre Tale of a Peculiar Department: Department Forgets to Suspend Corrupt Engineers; Realizes the Need for Suspension Only After They Secure Bail a Month and a Half Later—Two Suspended.

हजारीबाग। घूसखोरी मामले में विभाग की निष्क्रियता का अनूठा मामला सामने आया है। हजारीबाग जिले में जल संसाधन विभाग के दो अभियंता घूस लेते गिरफ्तार हुए थे। कमाल की बात ये है कि गिरफ्तारी को लेकर सरकार का ये नियम है कि कोई भी अधिकारी अगर 24 घंटे से ज्यादा वक्त तक अगर जेल में रहता है, तो उसे निलंबित किया जायेगा, लेकिन रिश्वत मामले में गिरफ्तार दो इंजीनियरों को सस्पेंड करने में 48 दिन का वक्त गुजर गया। हैरानी की बात ये है कि रिश्वत मामले में जब जमानत पर आरोपी इंजीनियर रिहा हो गये, तब विभाग को सस्पेंड करने का ख्याल आया।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा गिरफ्तारी के 48 दिन बाद विभाग ने कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो और सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को निलंबित कर दिया है। कार्रवाई में हुई देरी को लेकर प्रशासनिक हलकों में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जल संसाधन विभाग की ओर से 27 मई 2026 को अवर सचिव उपेंद्र कुमार सिन्हा ने निलंबन आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों का मुख्यालय हजारीबाग स्थित मुख्य अभियंता कार्यालय निर्धारित किया गया है।
हालांकि भ्रष्टाचार के मामलों में आमतौर पर गिरफ्तारी के तुरंत बाद निलंबन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है, लेकिन इस मामले में लगभग डेढ़ महीने से अधिक समय लगने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। गौरतलब है कि 9 अप्रैल 2026 को एसीबी की टीम ने हजारीबाग स्थित जलपथ प्रमंडल संख्या-दो कार्यालय में छापेमारी कर कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो और सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को गिरफ्तार किया था।
दोनों अधिकारियों पर 1.75 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और उन्हें जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में रखा गया था।मामले में नया मोड़ तब आया जब सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को न्यायालय से जमानत मिल गई। जमानत मिलने के बाद उन्होंने निलंबन आदेश की प्रति के साथ विभागीय कार्यालय में योगदान भी कर दिया।
सके बाद यह सवाल और तेज हो गया कि यदि विभाग ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद निलंबन की कार्रवाई की होती, तो ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।वहीं कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो को भी झारखंड हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अवकाशकालीन पीठ ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उन्हें जमानत का लाभ प्रदान किया।
राहुल मालतो के निलंबन के बाद विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्राक्कलन पदाधिकारी कृष्ण कुमार को जलपथ प्रमंडल संख्या-दो का जिला निकासी एवं व्यय पदाधिकारी (डीडीओ) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। विभाग का कहना है कि इससे वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उल्लेखनीय है कि हजारीबाग स्थित जल संसाधन विभाग का कार्यालय उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का प्रमुख केंद्र है। इसके अधीन हजारीबाग, कोडरमा, चतरा, गिरिडीह, रामगढ़ और बोकारो के कुछ क्षेत्रों में सिंचाई, नहर, चेक डैम और जल संरक्षण से जुड़ी करोड़ों रुपये की योजनाओं का संचालन किया जाता है।








