एक और तबाही वाला चक्रवात: Arnab तूफान से तो बच गये, Murasu Cyclone से कैसे बचोगे? फिर मंडराया तबाही का साया; जानिए कितना खतरनाक है मुरासु और कब दिखायेगा रौद्र रूप
Cyclone Murasu Update: अर्नब के बाद बंगाल की खाड़ी में मुरासु चक्रवात सक्रिय। 2-3 नवंबर को आंध्र प्रदेश तट पर लैंडफॉल की आशंका, जानिए हवा की रफ्तार और बारिश का अलर्ट।

Cyclone Murasu Update: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्नब की तबाही पर मरहम लगा भी नहीं है कि एक और तूफान ने दक्षिण भारत की चिंता बढ़ा दी है। चक्रवात मुरासु (Murasu Cyclone) तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन अब चक्रवाती तूफान मुरासु में बदल चुका है। इसके 2 नवंबर को गंभीर चक्रवाती तूफान बनने और 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है। मौसम विभाग ने समुद्र में ऊंची लहरों, तेज हवाओं और भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है।
आपको बता दें कि चिंता की बात यह है कि आंध्र प्रदेश अभी हाल ही में चक्रवात अर्नब के प्रभाव से उबर रहा है और अब एक नए तूफान का खतरा सामने है। हालांकि, शुरुआती अनुमान के मुताबिक मुरासु की ताकत अर्नब से कम रह सकती है, लेकिन इसकी रफ्तार और बारिश को देखते हुए तटीय इलाकों में सतर्कता बरतने की जरूरत है। आइए जानते हैं कितना खतरनाक है मुरासु चक्रवात, कब करेगा लैंडफॉल और इसका नाम मुरासु क्यों रखा गया है।
कितना खतरनाक है मुरासु चक्रवात?
भारतीय मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात मुरासु बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम-मध्य हिस्से में सक्रिय है। यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है। अनुमान है कि 2 नवंबर की सुबह तक यह गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) में बदल सकता है।
इस दौरान तूफान की निरंतर हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है, जबकि हवा के झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं। ऐसे में पेड़ गिरने, बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने और कच्चे मकानों को क्षति होने का खतरा बना हुआ है।
कब और कहां टकराएगा मुरासु चक्रवात?
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मुरासु 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार कर सकता है। इसके नेल्लोर और नरसापुर के बीच तट से टकराने की संभावना जताई गई है।तूफान की दिशा और गति पर मौसम वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन और मौसम विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
आंध्र प्रदेश समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मुरासु चक्रवात का असर केवल आंध्र प्रदेश तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। इसके प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में तेज हवाएं और भारी बारिश हो सकती है।
• आंध्र प्रदेश: तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं।
• ओडिशा: दक्षिणी हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है।
• तमिलनाडु और पुडुचेरी: कुछ इलाकों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है।
• केरल: कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर रखने को कहा गया है।
अर्नब और मुरासु में कितना अंतर है?
चक्रवात अर्नब के बाद मुरासु का खतरा सामने आने से लोगों के मन में सवाल है कि क्या दूसरा तूफान भी उतनी ही तबाही मचा सकता है?शुरुआती पूर्वानुमानों के अनुसार, मुरासु की तीव्रता अर्नब से कम रहने की संभावना है। अर्नब के दौरान आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में हवा की रफ्तार करीब 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की खबरें सामने आई थीं। वहीं, मुरासु के लिए फिलहाल 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर हवा और 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंकों का अनुमान है।हालांकि, तूफान की वास्तविक तीव्रता और नुकसान का आकलन उसके लैंडफॉल के बाद ही किया जा सकेगा। इसलिए इसे हल्के में लेना ठीक नहीं होगा।
क्या है मुरासु नाम का मतलब, भारत ने ही क्यों रखा यह नाम?
चक्रवात मुरासु के नाम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। इसका नाम भारत की ओर से सुझाया गया है और यह तमिल भाषा का शब्द है।तमिल में ‘मुरासु’ का अर्थ ढोल या नगाड़ा होता है। प्राचीन समय में मुरासु का इस्तेमाल लोगों तक महत्वपूर्ण संदेश पहुंचाने और चेतावनी देने के लिए किया जाता था। युद्ध, सार्वजनिक घोषणाओं और प्राकृतिक आपदाओं के समय भी ढोल बजाकर लोगों को सूचना दी जाती थी।इसी सांस्कृतिक महत्व के कारण भारत ने इस नाम का सुझाव दिया था। इस तरह मुरासु नाम केवल एक चक्रवात की पहचान नहीं, बल्कि तमिल संस्कृति और परंपरा से भी जुड़ा हुआ है।
कैसे और कौन रखता है चक्रवातों के नाम?
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवातों के नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (UNESCAP) के क्षेत्रीय चक्रवात पैनल की व्यवस्था के तहत रखे जाते हैं।इस पैनल में भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, मालदीव, ओमान, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन समेत 13 देश शामिल हैं। सभी देश अपनी ओर से चक्रवातों के नाम सुझाते हैं।नामकरण की व्यवस्था का उद्देश्य तूफानों की पहचान आसान बनाना और लोगों तक चेतावनी प्रभावी तरीके से पहुंचाना है।
चक्रवातों के नाम रखने के क्या हैं नियम?
चक्रवातों के नाम तय करने के लिए कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं।
• नाम छोटा, सरल और आसानी से बोला जा सकने वाला होना चाहिए।
• नाम अधिकतम आठ अक्षरों का होना चाहिए।
• नाम किसी धर्म, समुदाय, संस्कृति या राजनीतिक विचार के प्रति अपमानजनक नहीं होना चाहिए।
• नाम ऐसा होना चाहिए, जिसे अलग-अलग भाषाओं के लोग आसानी से समझ और याद रख सकें।
• एक बार इस्तेमाल किए गए नाम को दोबारा सूची में शामिल नहीं किया जाता।
क्यों बढ़ी मुरासु को लेकर चिंता?
लगातार दो चक्रवाती तूफानों का सामना करना किसी भी तटीय क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अर्नब के बाद मुरासु का आना आंध्र प्रदेश के लिए नई चिंता लेकर आया है। तेज हवाएं, भारी बारिश, समुद्र में ऊंची लहरें और संभावित जलभराव से जनजीवन प्रभावित हो सकता है।फिलहाल मौसम विभाग तूफान की दिशा, गति और तीव्रता पर नजर बनाए हुए है। ऐसे में तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए जरूरी है कि वे अफवाहों से बचें और IMD तथा स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।












