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कर्मचारियों के हाउस रेंट (HRA) नियम बदलेगा: सरकार करने जा रही है कर्मचारियों के वेतन में बड़ा बदलाव, हाउस रेंट निर्धारण के नियम बदलेंगे, वेतन में होगी बढ़ोत्तरी

Employee house rent rules to change: The government is going to make a major change in employee salaries; the rules for determining house rent will be revised, leading to an increase in salaries.

सरकार कर्मचारियों के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है। वित्त विभाग के प्रस्ताव के तहत 50 प्रतिशत टैक्स छूट वाले शहरों की सूची का विस्तार किया जा सकता है, जिससे महंगे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी बढ़ सकती है।
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HRA Hike News : सरकार कर्मचारियों के वेतन से जुड़े नियम में बड़ा बदलाव करने जा रही है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों के हाउस रेंट (HRA ) को लेकर नया फैसला करने जा रही है। इस फैसले से लगातार बढ़ते किराए और शहरी जीवन की महंगाई के बीच सैलरी क्लास के लिए कर्मचारियों को राहत मिलेगी। कर्मचारियों को फायदा देने के लिए केंद्र सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े एक पुराने नियम में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है।

अगर यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो लाखों कर्मचारियों को सीधे तौर पर टैक्स में राहत मिलेगी और उनकी इन-हैंड सैलरी में बढ़ोतरी हो सकती है।वर्तमान में इनकम टैक्स के पुराने सिस्टम (ओल्ड टैक्स रिजीम) के तहत HRA पर टैक्स छूट का एक तय ढांचा लागू है। इसके अनुसार देश के केवल चार महानगर—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई—में रहने वाले सैलरीड कर्मचारियों को HRA का अधिकतम 50 प्रतिशत तक टैक्स फ्री लाभ मिलता है।

वहीं, देश के बाकी सभी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित है। लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि बदलते समय और बढ़ती महंगाई को देखते हुए इस नियम की समीक्षा की जानी चाहिए।अब सरकार इसी दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के मुताबिक, 50 प्रतिशत HRA टैक्स छूट वाले शहरों की सूची का विस्तार किया जा सकता है।

इसमें बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों को शामिल करने की योजना है। इन शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को फिलहाल 40 प्रतिशत की सीमा में ही टैक्स छूट मिलती है, जबकि यहां किराए और जीवन यापन का खर्च कई मामलों में पारंपरिक महानगरों के बराबर या उससे भी ज्यादा हो चुका है।
अगर नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो HRA छूट का ढांचा कुछ इस तरह होगा—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई के साथ-साथ बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में रहने वाले कर्मचारियों को 50 प्रतिशत तक HRA टैक्स छूट मिलेगी। वहीं, देश के अन्य शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत ही रहेगी। इस बदलाव से खासतौर पर आईटी, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को फायदा होगा।

आपको बता दें कि पिछले एक दशक में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर देश के बड़े आर्थिक और रोजगार केंद्र बनकर उभरे हैं। इन शहरों में मल्टीनेशनल कंपनियों, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी हब्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसके चलते यहां नौकरी के अवसर तो बढ़े, लेकिन साथ ही मकानों के किराए में भी भारी उछाल देखने को मिला। कई इलाकों में किराया दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के बराबर पहुंच चुका है। ऐसे में पुराने HRA नियम मौजूदा शहरी हकीकत के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे।

यह प्रस्ताव उन कर्मचारियों के लिए खासतौर पर फायदेमंद होगा, जो अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प चुनते हैं। पुराने टैक्स सिस्टम में HRA, एलटीए और अन्य कई तरह की छूट का लाभ मिलता है, जबकि नए टैक्स सिस्टम में ज्यादातर छूट खत्म कर दी गई हैं। HRA छूट बढ़ने से टैक्सेबल इनकम घटेगी, जिससे कर्मचारियों को हर महीने कम टैक्स देना होगा। इसका सीधा असर कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा।

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