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झारखंड में नामांकन विवाद पर विधानसभा में हंगामा, सलमान खुर्शीद को सुनवाई से रोका गया, कांग्रेस के गंभीर आरोप

रांची। राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड में सियासी घमासान तेज हो गया है। निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर उठे विवाद के बाद विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। इस दौरान कांग्रेस और सत्ता पक्ष के नेताओं ने गंभीर आरोप भी लगाया । दरअसल नामांकन पत्रों की जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार द्वारा सुनवाई की जा रही थी।मिली जानकारी के मुताबिक इसी दौरान कांग्रेस की ओर से आपत्ति दर्ज कराने के लिए दिल्ली से पहुंचे वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को सुनवाई में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।

कांग्रेस ने इस फैसले पर जताई नाराजगी

वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद के रांची पहुंचने के बावजूद उन्हें पक्ष रखने की अनुमति नहीं मिलने पर कांग्रेस नेताओं में नाराजगी फैल गई। कांग्रेस कोटे की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, दीपिका पांडेय सिंह, राधाकृष्ण किशोर सहित कई नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय के बाहर विरोध जताया और जमकर हंगामा किया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि एक ओर नया शपथ पत्र स्वीकार किया गया, वहीं दूसरी ओर उनके वरिष्ठ अधिवक्ता को सुनवाई से वंचित रखा गया। इसे उन्होंने प्रक्रिया में पक्षपातपूर्ण रवैया बताया।

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विधानसभा प्रशासन पर भी सवाल

विरोध के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विधानसभा प्रशासन और स्टाफ की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मामले में सदन के संरक्षक की अनुपस्थिति चिंताजनक है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कर्मचारियों को प्रभावित कर प्रक्रिया को दिशा दी जा रही है।

“पूरी प्रक्रिया पहले से तय थी” – सलमान खुर्शीद

वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कहा कि वे विशेष रूप से दिल्ली से रांची पहुंचे थे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही सुनवाई समाप्त कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया पहले से तय प्रतीत होती है और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया।

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परिमल नाथवानी के नामांकन पर आपत्ति

कांग्रेस की ओर से यह भी आपत्ति जताई गई है कि परिमल नाथवानी के नाम में विसंगति और संपत्ति से जुड़ी जानकारी छुपाने के आरोप हैं। पार्टी का कहना है कि नामांकन स्वीकार किए जाने के बावजूद कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल बने हुए हैं, जिनकी विस्तृत जानकारी आदेश प्रतिलिपि जारी होने के बाद सामने आएगी।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विधानसभा परिसर के भीतर और बाहर दोनों जगह नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राज्यसभा चुनाव को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिख रहा है, जिससे झारखंड की राजनीति के और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।

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अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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