JPSC मेधा घोटाला: 10-15 लाख देकर परीक्षा पास करने का आरोप, दो सगे भाई गिरफ्तार
JPSC मेधा घोटाला मामले में CID ने हजारीबाग से दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर एजेंट के जरिए 10-15 लाख रुपये देकर 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास करने का आरोप है।

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितता, पेपर लीक और ओएमआर शीट में हेराफेरी के मामले की जांच कर रही CID ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में सफल रहे दो सगे भाइयों को हजारीबाग से गिरफ्तार किया है।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर एक एजेंट के माध्यम से पैसे देकर प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की।CID की जांच में सामने आया है कि दोनों अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कराने के लिए कथित तौर पर 10 से 15 लाख रुपये दिए थे। जांच एजेंसी को उस एजेंट के बारे में भी जानकारी मिली है, जिसकी तलाश की जा रही है।
सेटिंग के जरिए परीक्षा पास कराने का आरोप
JPSC मेधा घोटाला मामले में CID थाना कांड संख्या 16/2026 दर्ज कर जांच की जा रही है। जांच के दौरान एजेंसी को परीक्षा में कथित तौर पर पैसों के लेन-देन और सेटिंग के जरिए अभ्यर्थियों को सफल कराने से जुड़े सुराग मिले हैं। इसी जांच के आधार पर हजारीबाग के दोनों सगे भाइयों को गिरफ्तार किया गया है। CID अब कथित एजेंट और दोनों अभ्यर्थियों के बीच हुए लेन-देन तथा परीक्षा में सफलता दिलाने की पूरी प्रक्रिया की जांच कर रही है।
हजारीबाग से गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों की संख्या तीन
शनिवार की दोनों गिरफ्तारियों के बाद हजारीबाग से गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों की संख्या तीन हो गई है। CID के अनुसार JPSC मेधा घोटाला मामले में अब तक 27 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें नौ ऐसे लोग शामिल हैं, जिन्होंने अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी।
अब तक गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों में हजारीबाग के सुमन सौरभ, दीपक राणा और ओमप्रकाश राणा के अलावा लोहरदगा के उमाकांत उरांव, रांची के रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार, उत्तर प्रदेश के रक्षक सिंह तथा एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में सफल ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न शामिल हैं।
पूर्व JPSC अधिकारियों और परीक्षा एजेंसी से जुड़े लोग भी गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान CID ने JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों को भी गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपितों में TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान और एबाद सहित अन्य कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसी ने कथित सोर्स एजेंट उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को भी गिरफ्तार किया है।
सीट बेचने और OMR में हेराफेरी के आरोपों की जांच
CID की जांच का दायरा कथित तौर पर परीक्षा में सीट बेचने, पैसे लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने और OMR शीट में हेराफेरी जैसे आरोपों तक फैला हुआ है। एजेंसी अब गिरफ्तार अभ्यर्थियों, कथित एजेंटों और परीक्षा से जुड़े अन्य आरोपितों के बीच संबंधों की पड़ताल कर रही है।
दो सगे भाइयों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए कथित तौर पर रकम किस माध्यम से पहुंचाई गई और इस पूरी व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल थे। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।












