इंस्पेक्टर निकला डेढ़ करोड़ के सोना लूट का मास्टरमाइंड, SIT की जांच में बड़ा खुलासा, थाना प्रभारी को किया गया गिरफ्तार
Inspector turns out to be the mastermind of a 1.5 crore gold robbery; SIT investigation reveals major details; station in-charge arrested

Crime News: डेढ़ करोड़ के सोना लूट मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। रेलवे पुलिस का इस्पेक्टर डेढ़ करोड़ के सोना लूट का मास्टरमाइंड निकला। पूरा मामला बिहार के गया जिले का है। गया रेलवे पुलिस थाना के पूर्व थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को 1.44 करोड़ रुपये के सोना लूटकांड में मुख्य साजिशकर्ता पाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है। हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस में हुई इस सनसनीखेज लूट की जांच एसआईटी कर रही थी।
गया रेलवे पुलिस थाना के पूर्व थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह को 1.44 करोड़ रुपये के सोना लूटकांड का मुख्य साजिशकर्ता पाए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। यह सनसनीखेज मामला 21 नवंबर की रात हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस ट्रेन में हुई सोने की लूट से जुड़ा है, जिसने पूरे रेल और बिहार पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया था। रेल एसपी इनामुल हक के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने जब मामले की परतें खोलीं, तो चौंकाने वाला खुलासा सामने आया।
चलती ट्रेन में पुलिस जवानों ने लूटा था सोना
जांच में सामने आया कि यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिसकर्मी ही इस लूटकांड में शामिल थे और पूरी साजिश का मास्टरमाइंड खुद तत्कालीन थानाध्यक्ष था।गौरतलब है कि 21 नवंबर को हावड़ा–जोधपुर एक्सप्रेस ट्रेन में कोलकाता के एक सोना व्यापारी के कर्मचारी धनंजय शाश्वत से करीब एक किलो वजन के तीन सोने के बिस्कुट लूट लिए गए थे।
आरोप था कि गया जीआरपी के चार जवानों और दो सिविलियन युवकों ने जांच के नाम पर उसे रोका, फिर उसका बैग छीनकर जबरन ट्रेन से उतार दिया। लूट की कीमत करीब 1.44 करोड़ रुपये आंकी गई थी।धनंजय शाश्वत सोने के व्यापारी का माल लेकर कानपुर जा रहा था। घटना के बाद उसने अपने मालिक को पूरे मामले की जानकारी दी, जिसके बाद यह मामला सामने आया।
तकनीकी जांच से खुला राज
शुरुआत में किसी को भी यह अंदेशा नहीं था कि इस कांड में थानाध्यक्ष की भूमिका होगी। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड), मोबाइल टावर लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य और अन्य प्रमाणों के आधार पर पूरी साजिश की परतें खुलती चली गईं। जांच में राजेश कुमार सिंह की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद उन्हें पिछले महीने ही निलंबित कर दिया गया था।
पटना में 8 घंटे तक चली पूछताछ
संदेह गहराने के बाद पुलिस मुख्यालय, पटना में विशेष टीम द्वारा तत्कालीन थानाध्यक्ष से करीब 8 घंटे तक गहन पूछताछ की गई। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान राजेश कुमार सिंह कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया और रेल न्यायालय, पटना में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
केस दबाने की भी कोशिश का आरोप
जानकारी के मुताबिक, घटना के बाद पीड़ित के मालिक ने पहले कोलकाता रेल थाना में मामला दर्ज कराया था। बाद में केस पटना रेल एसपी कार्यालय पहुंचा, जहां से गया रेल थाना में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोप है कि शुरुआती दौर में तत्कालीन थानाध्यक्ष ने इस मामले को दबाने की भी कोशिश की, लेकिन जब मामला गंभीर होता चला गया तो खुद डीजीपी ने इसे संज्ञान में लेकर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
पुलिस विभाग की साख पर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और आंतरिक निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अधिकारी पर अपराध रोकने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, उसी का अपराध में शामिल होना व्यवस्था के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी और लूटे गए सोने की बरामदगी के लिए आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।









