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प्रभारी नहीं मानते सिविल सर्जन का आदेश: कर्मियों को नहीं दिया फरवरी का वेतन, निकाले अन्य मद में पैसे…. क्या निकासी अधिकारी करते है मन मुताबिक ट्रेज़री से पैसे की निकासी!

In-charges Defy Civil Surgeon's Orders: February Salaries Denied to Staff; Funds Withdrawn Under Other Heads... Do Drawing Officers Withdraw Money from the Treasury at Their Own Whim?

बताया जा रहा है कि यह घोटाला इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन के कर्मियों ने किया है. जिसमें वेतन मद के पैसे को गलत तरीके से अपने खाता में ट्रांसफर कर लिया. इस मामले में मुनीन्द्र कुमार और संजीव कुमार शामिल है. मुनीन्द्र इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन में अकाउंटेंट है जबकी संजीव एक कर्मचारी है. दोनों ने मिल कर इस खेल को अंजाम दिया है.  दोनों के खिलाफ कार्यकारी मजिस्ट्रेट मोहम्मद जफ़र हसमत ने कोतवाली थाना में केस दर्ज कराया है.

 रांची कोषागार से ऐसे हुई निकासी

वित्तीय वर्ष 2023-24,2024-25 और 2025-26 में अंजाम दिया गया है. सैलरी पोर्टल में छेड़ छाड़ कर दोनों कर्मचारियों ने पैसे को अपने अलग अलग खाते में ट्रांसफर किया है. दोनों ने अपने मूल वेतन में छेड़छाड़ किया और कोषागार से पैसे को ट्रांसफर कर लिया है.

रांची से पहले बोकारो और हजारीबाग में भी बड़ा घोटाला उजागर हुआ था. बोकारो में करीब 4.25 करोड़ और हजारीबाग में 15 करोड़ की राशी निकाली गई थी. जिसकी जांच पुलिस कर रही है. यहां दोनों जिला में पुलिस विभाग में गड़बड़ी कर पैसे की निकासी की गई.

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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