झारखंड में हाजिरी घोटाला: स्कूली बच्चों के हाजिरी में घोटाला कर पैसों का गोलमाल, हेडमास्टर पर गिरी गाज, जानिये किस तरह से किया गया घोटाला
Attendance Scam in Jharkhand: Funds Embezzled Through Fraudulent Attendance Records of Schoolchildren; Headmaster Faces the Axe—Find Out How the Scam Was Perpetrated.

स्कूल में फर्जी हाजिरी बनाकर मिड डे मील (MDM) राशि निकासी का घोटाला सामने आया है। शिकायत के बाद जांच हुई, जिसमें आरोप सही साबित हुआ। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद हेडमास्टर का वेतन रोका गया है और शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।
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Jharkhand School News। झारखंड के स्कूल में स्कूली बच्चों की हाजिरी में घोटाला कर पैसे का गोलमाल किया जा रहा है। मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है, वहीं विभाग की तरफ से कार्रवाई भी शुरू हो गयी है। मामला जामताड़ा जिले में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी है। मिड डे मील (MDM) योजना में फर्जीवाड़ा कर सरकारी राशि की निकासी का आरोप लगा है।
यह मामला नारायणपुर प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय चंपापुर का है, जहां जांच के बाद विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, विद्यालय के प्रधानाध्यापक श्रीचंद यादव पर आरोप है कि उन्होंने बच्चों की वास्तविक उपस्थिति से अधिक संख्या दिखाकर मध्याह्न भोजन योजना की राशि निकाली।
इस तरह की अनियमितता से न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ, बल्कि बच्चों के अधिकारों के साथ भी खिलवाड़ किया गया।मामले की जांच प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सर्किल मरांडी द्वारा की गई। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) ने संबंधित प्रधानाध्यापक का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।
वहीं इस मामले में प्रखंड स्तर से शिक्षक को शोकॉज नोटिस भी जारी किया गया है, जिसमें उनसे पूरे मामले पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि शिक्षक द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और कड़ी की जाएगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, अनियमितता या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासकर मिड डे मील योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में गड़बड़ी को गंभीर अपराध माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे बच्चों के पोषण और शिक्षा से जुड़ा हुआ है।









