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स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: जीवनभर मरीजों की सेवा करने वाले स्वास्थ्यकर्मी और उनका परिवार अब अपनी ही पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए खा रहे हैं दर-दर की ठोकरें, 5 महीने पहले मृतक कर्मी के परिवार को भी नहीं मिली फूटी कौड़ी

धनबाद/27.4.26: जिले के स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही सामने आई है। दशकों तक अस्पतालों में मरीजों की सेवा करने वाले स्वास्थ्यकर्मी अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) के बाद सुकून की जिंदगी जीने के बजाय, अपने ही हक़ के पैसे—पेंशन और ग्रेच्युटी—के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
​सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर असहयोग और लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कभी कागजों में कमी का बहाना बनाया जाता है, तो कभी उनकी फाइलें महीनों तक एक टेबल से दूसरी टेबल पर ही सरकती रहती हैं। कर्मी अब इसे घोर लापरवाही मान रहे है।

5 माह पहले मृत कर्मी छठीराम के परिवार को भी नहीं मिली राशि

मामला तो तब और शर्मनाक हो गई जब स्वास्थ्य विभाग के कर्मी की 5 महीना पहले मौत होने के वावजूद उसके परिवार को मृत्यु उपरांत मिलने वाली राशि नहीं दी गई।मामला गोविंदपुर प्रखंड का है। पुरुष कक्ष सेवक के पद पर कार्यरत छठीराम मालाकर की मृत्य 1 दिसंबर को हुई थी। 5 महीना बीतने के वावजूद मृत्यु उपरांत मिलने वाली राशि और बकाया वेतन तक नहीं दिया गया, जिससे परिवार काफी तंगहाली से गुजर रहा है।

नियमित आय बंद होने से गहराया आर्थिक संकट

महीनों से पेंशन शुरू न होने और रिटायरमेंट फंड न मिलने के कारण इन बुजुर्ग कर्मियों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि रोजमर्रा का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है और कुछ कर्मचारियों को तो अपनी जीवनरक्षक दवाओं और भोजन तक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।​

स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की पोल खोलते ही कई मामले आए सामने

हेल्थ एजुकेटर ओमकार के सामने भुखमरी की नौबत

निरसा में हेल्थ एजुकेटर के पद से नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त हुए ओमकार पांच महीने बाद भी अपने पैसों का इंतज़ार कर रहे हैं। रिटायरमेंट के दो महीने बाद 16 जनवरी को उनकी फाइल रांची भेजी गई, लेकिन गलत विभाग में। महीनों वहाँ फंसी रहने के बाद अब फाइल एजी ऑफिस पहुंची है, लेकिन भुगतान अभी भी लंबित है।

ऐसा ही मामला गोविंदपुर प्रखंड के हेल्थ एजुकेटर  का भी है जो दिसंबर 25 में रिटायर हो चुके है परंतु 4 महीने बीतने के बाद भी अब तक उनका पेंशन और सेवानिवृत्ति उपरांत मिलने वाली राशि प्राप्त नहीं हुई है।

एएनएम बुलू रानी सरकार को 5 महीने से नहीं मिला लाभ

निरसा की ही एएनएम बुलू रानी सरकार भी ओमकार के साथ ही रिटायर हुई थीं। विभागों की फाइलों की उलझन के कारण उन्हें अब तक सिर्फ ग्रुप इंश्योरेंस का पैसा मिला है। उनका अर्जित अवकाश (Earned Leave), ग्रेच्युटी और पेंशन सब कुछ अटका हुआ है।

एएनएम ईतू लक्ष्मी चक्रवर्ती फरवरी में हुई रिटायर

बाघमारा की एएनएम ईतू लक्ष्मी चक्रवर्ती 28 फरवरी को रिटायर हुईं। दो महीने बीत जाने के बाद भी उनकी फाइल तैयार नहीं है। हद तो तब हो गई जब उनके पेंशन फॉर्म में नाम और पैन नंबर तक गलत भर दिए गए। सुधार के लिए उन्हें दो दिन पहले कोलकाता से वापस बुलाकर हस्ताक्षर करवाए गए, लेकिन मामला अभी भी फंसा हुआ है।

दफ्तर में कार्यरत बाबुओं और पदाधिकारियों के अजब गजब तर्क है जिसे कतई तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। कभी मार्च का बहाना तो अलॉटमेंट की बहानेबाजी तो कभी काम का बोझ… इस तरह की जुमलेबाजी में रिटायरकर्मी और मृतक कर्मी के परिवार कार्यालय के चक्कर काट रहे है। इस तरह की लापरवाही में कार्यालय कर्मी और पदाधिकारी की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता, जबकि विभागीय सूत्रो की माने तो मृतक कर्मी और रिटायर कर्मी की मिलने वाली राशि में न तो वित्तीय वर्ष समाप्ति का चक्कर न ही अलॉटमेंट की पाबंदी रहती है।सरकारी नियमानुसार मृतक कर्मी के परिवार और सेवानिवृत्ति के फलस्वरूप देय राशि में देरी नदी की जानी चाहिए।इस संबंध में कई मामले न्यायालय वाद की वजह बनती है और कई मामले में स्वास्थ्य विभाग की किरकिरी हो चुकी है। पावना मिलने में देरी से गहरी साजिश का उभरना और असंतोष को गलत नहीं ठहराया जा सकता।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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