झारखंड: 15 दिन में सुधार लाईये नहीं तो…. स्वास्थ्य मंत्री का सिविल सर्जनों को अल्टीमेटम, बोले, काम नहीं कर सकते तो पद छोड़िये…
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रांची/19.6.26। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था फिर सवालों में हैं। समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य मंत्री जिस तरह से नाराज दिखे, उससे एक बात तो साफ हो गया, कि स्वास्थ्य व्यवस्था की मौजूदा स्थिति से वो भी काफी नाराज हैं। अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, संसाधनों का अभाव, एंबुलेंस संकट और मरीजों की लगातार बढ़ती शिकायतों के बीच स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है।
नामकुम स्थित एनआरएचएम कार्यालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मंत्री ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को 15 दिनों के भीतर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने का अल्टीमेटम दिया है।बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन मौजूद रहे। स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर सुधार नहीं दिखा तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
“काम नहीं कर सकते तो पद पर रहने का अधिकार नहीं”
वहीं, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने दो टूक कहा कि जो अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर सकते, उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि छोटी-छोटी समस्याएं मीडिया की सुर्खियां बनने से पहले ही विभागीय स्तर पर उनका समाधान किया जाए।
मंत्री ने कहा कि जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी।
क्या सिर्फ चेतावनी से सुधर जाएगी व्यवस्था?
हालांकि समीक्षा बैठक के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल चेतावनी और समीक्षा बैठकों से स्वास्थ्य व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव है? राज्य के कई सरकारी अस्पताल आज भी डॉक्टरों, दवाओं, उपकरणों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि जवाबदेही तय करना जरूरी है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए पर्याप्त संसाधन, मानवबल और आधारभूत संरचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
एंबुलेंस संकट दूर करने की तैयारी
राज्य के अधिकांश सदर अस्पताल अभी भी अपनी स्वतंत्र एंबुलेंस सेवा से वंचित हैं और मरीजों को मुख्य रूप से 108 एंबुलेंस सेवा पर निर्भर रहना पड़ता है। इस समस्या को स्वीकार करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने घोषणा की कि सदर अस्पतालों और रेफरल अस्पतालों के लिए जल्द ही 224 नई एंबुलेंस खरीदी जाएंगी।सरकार का दावा है कि इससे मरीजों को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
15 दिन बाद होगी असली परीक्षा
अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि समीक्षा बैठक के बाद अस्पतालों की व्यवस्था में जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव दिखाई देता है या फिर यह कवायद भी सरकारी बैठकों और फाइलों तक ही सीमित रह जाती है।फिलहाल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए यह 15 दिन किसी परीक्षा से कम नहीं होंगे, क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि परिणाम नहीं दिखे तो कार्रवाई तय है।








