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झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 35 साल अलग रहने के बाद तलाक बरकरार, पत्नी को 40 लाख भरण-पोषण

झारखंड हाई कोर्ट ने 35 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी के तलाक को बरकरार रखते हुए पत्नी को 40 लाख रुपये स्थायी भरण-पोषण देने का आदेश दिया।

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक अहम मामले में फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए पति-पत्नी के तलाक (विवाह विच्छेद) को बरकरार रखा है। साथ ही कोर्ट ने पत्नी को राहत देते हुए पति को 40 लाख रुपये एकमुश्त स्थायी भरण-पोषण देने का आदेश दिया है।

अदालत ने फैसला दिया है कि यह राशि 12 महीने के भीतर चार बराबर किश्तों में दी जाए। पहली किश्त एक महीने के अंदर देना अनिवार्य होगा। यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो पत्नी को कानूनी कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पति-पत्नी वर्ष 1990 से अलग रह रहे हैं। यानी पिछले 35 सालों से उनका वैवाहिक संबंध केवल कागजों तक सीमित है और अब उनके बीच दोबारा साथ रहने की कोई संभावना नहीं बची है।

कोर्ट ने यह भी माना कि—

  • पत्नी खुद वैवाहिक घर छोड़कर चली गई थीं
  • लंबे समय तक वापस नहीं लौटीं
  • पति के साथ वैवाहिक जिम्मेदारियां नहीं निभाईं

इसके अलावा, झूठे आपराधिक केस दर्ज करना और वर्षों तक अलग रहना मानसिक क्रूरता (Mental Cruelty) माना गया।

हाई कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने क्रूरता और परित्याग (Cruelty & Desertion) के आधार पर जो तलाक दिया था, वह पूरी तरह सही है। इसलिए पत्नी की अपील को खारिज कर दिया गया।💰

कोर्ट ने साफ कहा कि—

  • पत्नी की कोई खुद की आय नहीं है
  • उसे शादी के दौरान मिले जीवन स्तर के अनुसार आर्थिक सुरक्षा मिलनी चाहिए

हालांकि, कोर्ट ने पति की स्थिति भी देखी—

  • वह जल्द रिटायर होने वाले हैं
  • उन पर अन्य जिम्मेदारियां भी हैं

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए 40 लाख रुपये का एकमुश्त भरण-पोषण उचित माना गया।

क्या है पूरा मामला?

  • शादी: 29 मई 1984 (हिंदू रीति-रिवाज से)
  • एक बेटी, जिसकी शादी 2007 में हो चुकी है
  • पत्नी 1990 में मायके चली गईं और वापस नहीं लौटीं

पति का दावा:
कई बार पत्नी को वापस लाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली।

पत्नी का पक्ष:

  • 1992 में घरेलू हिंसा का केस दर्ज
  • 2010 में भरण-पोषण का केस (समझौते के बाद ₹5000/माह मिलने लगे)

2019 में:
पति ने फैमिली कोर्ट, जामताड़ा में तलाक की याचिका दायर की

 फैमिली कोर्ट:
पति के पक्ष में फैसला, तलाक मंजूर

 हाई कोर्ट:
पत्नी की अपील खारिज, तलाक बरकरार + ₹40 लाख भरण-पोषण

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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