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Jharkhand News- दो अफसर सस्पेंड: सुप्रीम कोर्ट से जुड़े CCTV मामले में झारखंड सरकार की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त सचिव और अवर सचिव निलंबित

झारखंड के 606 थानों में CCTV कैमरे लगाने की परियोजना से जुड़ी रिपोर्ट बिना सक्षम अनुमति भेजने के मामले में गृह विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। जानिए पूरा मामला।

Jharkhand CCTV Officers Suspended। झारखंड सरकार ने गलत जानकारी भेजने वाले दो अफसरों को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि दोनों अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट के वकील को गलत जानकारी भेजी थी। राज्य के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से जुड़े संवेदनशील मामले से ये पूरा प्रकरण जुड़ा है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों को नियमों की अनदेखी और बिना सक्षम अनुमति के रिपोर्ट भेजने के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

यह मामला राज्य के 606 थानों में CCTV कैमरे लगाने की परियोजना और सुप्रीम कोर्ट में उसकी प्रगति रिपोर्ट से जुड़ा है।कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार संयुक्त सचिव मनीषा जोसेफ तिग्गा और अवर सचिव संजय कुमार झा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों के मुख्यालय भी निर्धारित कर दिए गए हैं।

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जानिये संयुक्त सचिव पर क्या हैं आरोप?

सरकार के अनुसार, संयुक्त सचिव मनीषा जोसेफ तिग्गा ने राज्य के थानों में सीसीटीवी स्थापना से संबंधित रिपोर्ट बिना सक्षम प्राधिकार की मंजूरी के भेज दी। आरोप है कि रिपोर्ट में वास्तविक तथ्यों से अलग जानकारी शामिल थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अमिकस क्यूरी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को भेजा गया।

सरकार का कहना है कि इस कारण पहले भेजी गई रिपोर्ट को वापस लेकर संशोधित रिपोर्ट तैयार करनी पड़ी, जिससे पूरे मामले में प्रशासनिक असहज स्थिति उत्पन्न हुई। इसके बाद विभागीय अनुशंसा के आधार पर उनके खिलाफ झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2016 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई।

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जानिये अवर सचिव पर भी कार्रवाई क्यों?

दरअसल अवर सचिव संजय कुमार झा पर आरोप है कि उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन किए बिना अपने स्तर पर ई-मेल के जरिए रिपोर्ट सीधे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे के कार्यालय भेज दी।
विभागीय जांच में सामने आया कि संबंधित जानकारी सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग से प्राप्त कर अधिकृत माध्यम से भेजी जानी थी। इसके बावजूद निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सरकार ने इसे संवेदनशील मामले में लापरवाही और स्वेच्छाचारिता मानते हुए निलंबन का निर्णय लिया।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है प्रक्रिया

राज्य के सभी थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन से जुड़ा है। अदालत ने इस मामले की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। हाल ही में इस परियोजना की समीक्षा के लिए राज्यों के गृह विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक भी आयोजित की गई थी।

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606 थानों में लगेंगे 8,854 हाईटेक कैमरे

झारखंड सरकार ने जनवरी 2026 में राज्य के 606 पुलिस थानों में आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना को मंजूरी दी थी। करीब 134 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत 8,854 हाई-टेक कैमरे लगाए जाने प्रस्तावित हैं।इन कैमरों में नाइट विजन, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और निगरानी की आधुनिक सुविधाएं होंगी। फिलहाल परियोजना की तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं।

प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा संदेश

इस कार्रवाई को प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिया है कि न्यायालय से जुड़े संवेदनशील मामलों में निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत अनुमोदन का पालन अनिवार्य है तथा किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी होने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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