मंत्रीजी देखिये ! फटे टायर में बिना आक्सीजन के दौड़ रही थी एंबुलेंस, अंदर तड़प-तड़पकर मरीज की हो गयी मौत
झारखंड के पटमदा में 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं होने और रास्ते में टायर फटने के बीच अस्पताल ले जाते समय 65 वर्षीय मरीज की मौत हो गई। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया।

108 Ambulance Negligence। पटमदा (ईस्ट सिंहभूम)। झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मिंदा करने का एक और मामला सामने आया है। फटे टायर के साथ बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के कई किलोमीटर तक 108एंबुलेंस दौड़ती रही और अंदर मरीज तड़प-तड़प कर मर गया। ये शर्मनाक मामला पूर्वी सिंहभूम के पटमदा प्रखंड से सामने आई है। मिली जानकारी के मुताबिक गांव के 65 वर्षीय संतोष कुंभकार की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने मदद के लिए 108 एंबुलेंस बुलाई, लेकिन आरोप है कि जिस वाहन से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, उसमें मरीज की जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन उपलब्ध ही नहीं थी।
हालात तब और बिगड़ गए, जब अस्पताल पहुंचने से पहले ही एंबुलेंस का टायर फट गया। आखिरकार रास्ते में ही मरीज ने दम तोड़ दिया। आपको बता दें कि इससे पहले भी एंबुलेंस की बदहाली की वजह से एक युवती की मौत की खबर आयी थी। इस घटना के एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें परिजन एंबुलेंस को धक्का मारते रहे लेकिन एंबुलेंस स्टार्ट नहीं हुई।
सांस लेने में दिक्कत, लेकिन नहीं मिला ऑक्सीजन सपोर्ट
परिजनों के मुताबिक संतोष कुंभकार को अचानक सांस लेने में परेशानी होने लगी। उन्होंने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा का सहारा लिया। परिवार का आरोप है कि वाहन में ऑक्सीजन सिलेंडर तो मौजूद था, लेकिन उसमें ऑक्सीजन नहीं थी। मजबूरी में बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के ही मरीज को अस्पताल ले जाया गया।
जर्जर सड़क बनी दूसरी मुसीबत
माचा सीएचसी पहुंचने से पहले गांव की खराब सड़क पर एंबुलेंस का टायर फट गया। चालक ने वाहन रोकने के बजाय किसी तरह उसे चलाते हुए अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने संतोष कुंभकार को मृत घोषित कर दिया।
परिवार बोला- समय पर सुविधा मिलती तो बच सकती थी जान
घटना के बाद मृतक के परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर एंबुलेंस में ऑक्सीजन की व्यवस्था रहती और वाहन तकनीकी रूप से दुरुस्त होता, तो संतोष कुंभकार की जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य विभाग ने मानी सुधार की जरूरत
माचा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि 108 एंबुलेंस का संचालन रांची स्थित मुख्यालय से होता है। उन्होंने कहा कि संबंधित एंबुलेंस हाल ही में मरम्मत के बाद भेजी गई थी, लेकिन इस घटना के बाद व्यवस्था में सुधार की जरूरत से इनकार नहीं किया जा सकता।
आपातकालीन सेवा पर फिर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि जिन एंबुलेंसों पर गंभीर मरीजों की जिंदगी टिकी होती है, क्या उनकी नियमित तकनीकी जांच और जीवनरक्षक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है? यदि परिजनों के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक मरीज की मौत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।








