झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सड़क हादसे में मृत चालक के परिवार को मिलेगा तीन गुना ज्यादा मुआवजा, 1.87 लाख से बढ़कर 5.85 लाख रुपये
झारखंड हाई कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मृत चालक के परिवार को राहत देते हुए MACT मुआवजा राशि 1.87 लाख से बढ़ाकर 5.85 लाख रुपये कर दी। जानिए पूरा मामला।

रांची: सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले ड्राइवर के परिवार को झारखंड हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT), तेनुघाट द्वारा तय की गई मुआवजा राशि को बढ़ाते हुए करीब तीन गुना कर दिया है। अदालत ने मृत चालक के आश्रितों को मिलने वाली राशि 1.87 लाख रुपये से बढ़ाकर 5.85 लाख रुपये कर दी है।यह फैसला हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनाया।
मृत चालक की पत्नी और बच्चों ने दायर की थी अपील
दरअसल यह मामला ड्राइवर बिजली रविदास की मौत से जुड़ा था। सड़क दुर्घटना में उनकी मृत्यु के बाद उनकी पत्नी वीणा देवी और बच्चों ने मुआवजा राशि बढ़ाने के लिए हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।परिवार का कहना था कि मृतक पेशे से चालक थे और उनकी मासिक आय इतनी थी कि पहले तय की गई मुआवजा राशि पर्याप्त नहीं थी। अपीलकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हर्ष चंद्र और अभिजीत कुमार सिंह ने अदालत में पक्ष रखा।
अधिकरण ने कम मानी थी आय
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने मृत चालक की वार्षिक आय केवल 15,000 रुपये निर्धारित की थी।वहीं परिवार की ओर से दावा किया गया था कि बिजली रविदास चालक के रूप में लगभग 4,000 रुपये प्रतिमाह कमाते थे। हालांकि इस आय के समर्थन में कोई वेतन पर्ची, दस्तावेज या नियोक्ता की गवाही उपलब्ध नहीं थी।
इसके बावजूद हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ दस्तावेजी प्रमाण नहीं होने के आधार पर किसी व्यक्ति की वास्तविक आय के दावे को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि मृतक चालक का काम करते थे, इसलिए उनकी आय को अधिक वास्तविक आधार पर तय किया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट ने आय 2 हजार रुपये प्रतिमाह मानी
अदालत ने मृतक की आय 2,000 रुपये प्रतिमाह यानी 24,000 रुपये वार्षिक तय की।इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार मृतक की भविष्य की संभावित आय में 40 प्रतिशत वृद्धि जोड़ी गई। फिर व्यक्तिगत खर्च की कटौती और उम्र के आधार पर 17 का मल्टीप्लायर लागू किया गया।इस गणना के आधार पर परिवार को होने वाली आय हानि (Loss of Dependency) 4,35,200 रुपये निर्धारित की गई।
अलग-अलग मदों में भी दी गई राशि
हाई कोर्ट ने सिर्फ आय हानि ही नहीं, बल्कि अन्य मदों में भी मुआवजा तय किया।
अदालत ने दिया:
• संपत्ति हानि: 15,000 रुपये
• अंतिम संस्कार खर्च: 15,000 रुपये
• कंसोर्टियम राशि: तीनों दावेदारों को 40-40 हजार रुपये, कुल 1.20 लाख रुपये
इन सभी मदों को जोड़ने के बाद कुल मुआवजा राशि 5,85,200 रुपये तय हुई।
छह प्रतिशत ब्याज के साथ मिलेगी राशि
हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि बढ़ी हुई मुआवजा राशि पर दावा याचिका दाखिल करने की तारीख से भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाएगा।अदालत ने यह भी कहा कि दुर्घटनाग्रस्त ट्रक का बीमा था और बीमा कंपनी ने अपनी जिम्मेदारी को चुनौती नहीं दी है। इसलिए बीमा कंपनी को ही बढ़ी हुई राशि का भुगतान करना होगा।
छह सप्ताह में जमा करनी होगी राशि
हाई कोर्ट ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि पहले से भुगतान की गई राशि को समायोजित करते हुए शेष मुआवजा राशि छह सप्ताह के भीतर हाई कोर्ट में जमा करे।इसके बाद यह राशि सीधे मृत चालक के परिवार के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी।
फैसले का महत्व
यह फैसला सड़क दुर्घटना पीड़ित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी मृत व्यक्ति की आय का पूरा दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है, तब भी उसके पेशे और परिस्थितियों को देखते हुए उचित आय का आकलन किया जा सकता है। इससे दुर्घटना में कमाने वाले सदस्य को खो चुके परिवारों को न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
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झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: मृत चालक के परिवार को 1.87 लाख की जगह मिलेगा 5.85 लाख मुआवजा
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