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झारखंड Vs केंद्र : कल केंद्र के खिलाफ झारखंड में बड़ा प्रदर्शन, जानिये MMDR बिल लागू होने से क्या बढ़ जायेगा खतरा, पूरी रिपोर्ट

JMM announces a massive protest across Jharkhand tomorrow against the MMDR Amendment Act. Learn about the objections, losses, and economic blockade threats.

रांची: झारखंड में कल से केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन होने वाला है। केंद्र सरकार द्वारा पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम (MMDR Amendment Act) को लेकर झारखंड की सियासत का पारा चढ़ चुका है। इसे लेकर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस कानून के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कल (7 सितंबर) पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर जनांदोलन का ऐलान किया है।
झामुमो ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि केंद्र ने इस निर्णय को वापस नहीं लिया या राज्य के लिए वैकल्पिक वित्तीय भरपाई की व्यवस्था नहीं की, तो आंदोलन को उग्र बनाते हुए पूरे राज्य में खनिज परिवहन रोककर ‘आर्थिक नाकेबंदी’ की जाएगी। आपको बता दें कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में पार्टी की अहम बैठक हुई थी, जिसमें आंदोलन की रणनीति तैयार की गयी थी। कल जो आंदोलन होगा, वो आंदोलन का दूसरा चरण होगा।

प्रखंड से राजभवन तक: चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा

मुख्यमंत्री और JMM के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद पार्टी ने इस आंदोलन को संगठन के जमीनी स्तर तक ले जाने की रणनीति बनाई है:
  • कल (7 सितंबर) पहला चरण: राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों पर एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन होगा। बीडीओ (BDO) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
  • दूसरा चरण: जिला मुख्यालयों पर बड़े विरोध प्रदर्शन, बंद और मशाल जुलूस निकाले जाएंगे।
  • तीसरा चरण: राजभवन के समक्ष प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध दर्ज कराया जाएगा।
  • अंतिम चेतावनी: मांगें पूरी न होने की स्थिति में राज्य से खनिजों की सप्लाई और आवाजाही पूरी तरह ठप करने के लिए आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी।

क्यों हो रहा है विरोध? क्या हैं झारखंड की मुख्य आपत्तियां?

झारखंड सरकार और झामुमो का मानना है कि यह संशोधन कानून राज्य के हितों और संघीय ढांचे पर सीधा आघात है:
  1. सालाना हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान: राज्य सरकार का अनुमान है कि इस नए प्रावधान से राज्य के खजाने को भारी क्षति होगी। गठबंधन सहयोगी कांग्रेस के आकलन के मुताबिक यह नुकसान ₹14,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।
  2. कल्याणकारी योजनाओं पर मंडराता संकट: राजस्व में इस बड़ी कटौती का सीधा असर राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ेगा। विशेषकर ‘मैयां सम्मान योजना’ और ‘अबुआ आवास योजना’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं वित्तीय संकट में आ सकती हैं।
  3. वित्तीय स्वायत्तता और अधिकारों पर हमला: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसे “काला कानून” करार देते हुए कहा कि “झारखंड की खनिज संपदा पर अधिकार यहां के लोगों का है। दिल्ली में बैठकर केंद्र सरकार यह तय नहीं कर सकती कि राज्य अपने संसाधनों का इस्तेमाल कैसे करे।”

राजनीतिक घमासान और आगे की राह

झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने साफ किया कि राज्यव्यापी जन-जागरण अभियान के बाद कार्यकर्ता सड़कों पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वहीं, विपक्षी दल भाजपा का रुख इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के समर्थन में है, जिससे आने वाले दिनों में झारखंड का सियासी माहौल और अधिक गरमाने के आसार हैं।
कल होने वाले प्रदर्शन से राज्य सरकार केंद्र को कड़ा संदेश देना चाहती है कि खनिज संपदा से समृद्ध यह राज्य अपने अधिकारों से किसी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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