रांची में स्वाइन फ्लू का प्रकोप: कुल मरीज 41 पहुंचे, बच्चों में बढ़ा संक्रमण; रिम्स में मास्क पहनकर पहुंच रहे मरीज
झारखंड में स्वाइन फ्लू का प्रकोप बढ़ा। रांची में संक्रमितों की संख्या 38 पहुंची, रिम्स में बढ़ी सतर्कता। जानें H1N1 के लक्षण, श्रेणियां और बचाव के तरीके। Swine Flu Cases Rise in Ranchi: Total Reaches 41, Know Symptoms and Prevention Tips

Ranchi News: झारखंड में स्वाइन फ्लू (H1N1) का खतरा बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। अस्पतालों में लगातार मरीज बढ़ रहे हैं। ना सिर्फ सरकारी अस्पतालों में, बल्कि निजी अस्पतालों में भी स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। गुरुवार को आये मरीजों के आंकड़े काफी चौकाने वाले रहे। इन आंकड़ों से स्वास्थ्य विभाग की भी चुनौतियां को बढ़ा दिया है।
शहर की निजी लैब माइक्रोप्रैक्सिस द्वारा दो नए मामलों की पुष्टि के बाद राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। राहत की बात यह है कि रिम्स (RIMS) के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में जांच किए गए 4 संदिग्ध मरीजों के सैंपल निगेटिव आए हैं।हालात को देखते हुए रिम्स के ओपीडी (OPD) परिसर में मरीज और उनके परिजन मास्क पहनकर पहुंच रहे हैं। विशेषकर टीबी एंड चेस्ट विभाग के बाहर लोग संक्रमण से बचाव के लिए अधिक एहतियात बरत रहे हैं।
रांची बना स्वाइन फ्लू का हॉटस्पॉट
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के कुल 41 मामलों में से अकेले 38 मरीज रांची जिले से हैं, जबकि 3 संक्रमित जमशेदपुर के हैं। स्वाइन फ्लू को लेकर चिंता की बात यह है कि रांची के कुल मरीजों में 20 बच्चे शामिल हैं। हाल ही में रिपोर्ट हुए दो नए मामलों में भी एक बच्चा शामिल है।
स्वाइन फ्लू (H1N1) के लक्षण: समझें 3 श्रेणियां (Category A, B & C)
डॉक्टरों ने स्वाइन फ्लू की गंभीरता के आधार पर इसे तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है:
- माइल्ड (Category A): हल्का बुखार, खांसी, सर्दी, शरीर में दर्द और थकान महसूस होना।
- मॉडरेट (Category B):Category A के लक्षणों के साथ तेज बुखार और गले में खराश/दर्द होना। यह श्रेणी गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिल, किडनी, फेफड़े या डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए अधिक जोखिम भरी है।
- गंभीर (Category C): सांस लेने में तकलीफ, सीने में तेज दर्द, बलगम में खून आना और नाखूनों का नीला पड़ना। इस स्थिति में मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराकर टेमीफ्लू (Tamiflu) दवा और आइसोलेशन में रखा जाता है।
स्वाइन फ्लू से बचाव: क्या करें और क्या न करें?
स्वाइन फ्लू एक सांस से संबंधित संक्रामक बीमारी है जो हवा और संक्रमित सतहों (जैसे दरवाजे के हैंडल, फोन या रिमोट) को छूने से फैलती है। इससे बचने के लिए निम्नलिखित सावधानियां अपनाएं:
क्या करें (Do’s):
- मास्क पहनें: सार्वजनिक स्थानों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर नाक और मुंह ढंककर रखें।
- हाथों की सफाई: समय-समय पर साबुन-पानी से हाथ धोते रहें।
- तरल पदार्थ लें: शरीर को हाइड्रेटेड रखें और पर्याप्त आराम करें।
- वार्षिक टीकाकरण: डॉक्टरों की सलाह पर फ्लू का टीका (Flu Vaccine) ज़रूर लगवाएं।
क्या न करें (Don’ts):
- बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा (Self-Medication) न लें।
- भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर जाने, हाथ मिलाने या गले मिलने से बचें।
- बुखार ठीक होने के कम से कम 24 घंटे बाद तक घर से बाहर न निकलें।
- गर्भवती महिलाएं नाक में दिए जाने वाले फ्लू स्प्रे का इस्तेमाल न करें।









