अंधविश्वास ने छीनीं दो भाईयों की जिंदगियां: बुखार को माना ‘बाहरी हवा’, झाड़-फूंक के चक्कर में दो की मौत, मां की हालत नाजुक
रामगढ़ के पारगड़ा में मलेरिया और टाइफाइड से पीड़ित दो भाइयों की इलाज में देरी और झाड़-फूंक के कारण मौत हो गई। जानें टाइफाइड और मलेरिया होने पर क्या करें।

Ramgarh News : बाहरी हवा का साया समझकर परिवार झाड़ फूंक कराता रह गया, इधर दो सगे भाई की जान चली गयी। अंधविश्वास की कीमत एक परिवार को दो-दो मौत के साथ चुकानी पड़ी। मामला झारखंड के भदानीनगर ओपी क्षेत्र के पाली पंचायत स्थित सुद्दी पारगढ़ा गांव से आयी है, जहां एक बेहद दर्दनाक और आंखें खोल देने वाली खबर सामने आई है।
अंधविश्वास और सही समय पर इलाज न मिलने के कारण एक ही परिवार के दो सगे भाइयों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं।जंगलों से खुखड़ी (मशरूम) चुनकर लौटे परिवार को जब तेज बुखार आया, तो परिजनों ने इसे डॉक्टरी बीमारी मानने के बजाय ‘ऊपरी हवा’ का साया समझ लिया। दो-तीन दिनों तक चले झाड़-फूंक के खेल ने आखिरकार दो चिराग बुझा दिए। मां की हालत इस कदर खराब है कि वो बेटे का अंतिम दर्शन तक नहीं कर सकी।
अंधविश्वास का खौफनाक मंजर: डॉक्टर की जगह घर बुलाया तांत्रिक
पारगड़ा निवासी शंकर बेदिया (जो ओडिशा में मजदूरी करते हैं) के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के अनुसार:
- अचानक बिगड़ी तबीयत: तीन-चार दिन पहले शंकर बेदिया के 15 वर्षीय बेटे रामकिसुन, 10 वर्षीय बेटे साहिल और पत्नी संगीता देवी को एक साथ तेज बुखार आया।
- अंधविश्वास का जाल: परिजनों को शक हुआ कि जंगल-पहाड़ों में खुखड़ी चुनने के दौरान उन्हें कोई ‘ऊपरी हवा’ लग गई है। इलाज कराने के बजाय घर पर तांत्रिक को बुलाकर झाड़-फूंक शुरू करा दी गई।
- समय बीतता गया, तबीयत बिगड़ती गई: घर में अगरबत्ती जलती रही और तांत्रिक मंत्र फूंककर ठीक करने का दावा करता रहा। इस दौरान तीनों मरीजों की स्थिति लगातार नाजुक होती चली गई।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही टूट गईं सांसें
जब स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई, तब परिजनों ने एक निजी चिकित्सक से संपर्क किया। पैथोलॉजी जांच में पता चला कि तीनों मलेरिया और टाइफाइड (Coinfection) से पीड़ित थे। दवाएं शुरू हुईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
बुधवार शाम तबीयत अत्यधिक बिगड़ने पर स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को भुरकुंडा के निजी क्लिनिक ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बड़े बेटे रामकिसुन (15) को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद गंभीर रूप से पीड़ित छोटे बेटे साहिल (10) और मां संगीता देवी को सदर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में साहिल ने भी दम तोड़ दिया।
मां संगीता देवी की अत्यंत नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें रांची रिम्स (RIMS) रेफर किया गया है। ओडिशा से लौटे पिता शंकर बेदिया और बड़ी बहन बेबी कुमारी का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्वास्थ्य गाइड: मलेरिया-टाइफाइड होने पर क्या करें और क्या न करें?
यह दुखद घटना इस बात का प्रमाण है कि बीमारियों के प्रति लापरवाही और अंधविश्वास जानलेवा हो सकता है। यदि घर में किसी को तेज बुखार आए, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
1. क्या करें (Do’s):
- तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें: बुखार आते ही नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या योग्य डॉक्टर को दिखाएं।
- ब्लड टेस्ट करवाएं: डॉक्टर की सलाह पर तुरंत मलेरिया, टाइफाइड या डेंगू की जांच (Pathology Test) कराएं।
- पानी और तरल पदार्थ दें: मरीज को निर्जलीकरण (Dehydration) से बचाने के लिए उबला हुआ पानी, ओआरएस (ORS) या नारियल पानी दें।
- मच्छरदानी का प्रयोग करें: मलेरिया से बचाव के लिए हमेशा मच्छरदानी में सोएं और आसपास पानी जमा न होने दें।
2. क्या न करें (Don’ts):
- झाड़-फूंक से बचें: अंधविश्वास या झाड़-फूंक के चक्कर में एक मिनट भी समय बर्बाद न करें।
- खुद से दवा (Self-Medication) न लें: बिना मेडिकल सलाह के बाजार से मनमाफिक एंटीबायोटिक या पैरासिटामोल न खाएं।
- साफ-सफाई में लापरवाही न बरतें: दूषित पानी और बासी खाने से टाइफाइड का खतरा बढ़ता है, इसलिए हमेशा ताजा भोजन और स्वच्छ जल का सेवन करें।
बीमारियां शारीरिक और जैविक कारणों से होती हैं, किसी ‘ऊपरी हवा’ या तंत्र-मंत्र से नहीं। सही समय पर मिला डॉक्टरी इलाज ही किसी की जान बचा सकता है। अंधविश्वास से दूर रहें और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।












