झारखंड : निकाय चुनाव का ऐलान एक-दो दिनों में, मुख्यमंत्री के लौटने के बाद हो सकती है चुनाव की तारीखों की घोषणा, आचार संहिता भी हो जायेगी लागू….
Jharkhand: Municipal elections to be announced in a day or two; election dates likely after the Chief Minister returns; code of conduct to be implemented.

रांची। झारखंड में लंबे समय से लंबित शहरी स्थानीय निकाय चुनावों की घोषणा किसी भी दिन हो सकती है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के झारखंड लौटते ही किसी भी दिन चुनाव का ऐलान हो जायेगा। हालांकि उससे पहले एक कैबिनेट की बैठक भी हो सकती है। राज्य चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक जनवरी के अंतिम सप्ताह में इसका ऐलान हो सकता है, हालांकि अगर विषम परिस्थिति बनी, तो फरवरी के पहले सप्ताह तक चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और आरक्षण से संबंधित अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। अब सिर्फ चुनाव तिथियों की औपचारिक घोषणा बाकी है।आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव कराने से जुड़ी लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और अब केवल तिथियों की घोषणा शेष है।
राज्य निर्वाचन आयोग पहले ही शहरी स्थानीय निकायों में आरक्षण से संबंधित अधिसूचना जारी कर उसे गजट में प्रकाशित कर चुका है। यह चुनाव प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है, जिसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम घोषित किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, चुनाव की तिथियों से संबंधित प्रस्ताव को राज्यपाल की सहमति भी मिल चुकी है, जिससे अब किसी प्रकार की संवैधानिक बाधा शेष नहीं रह गई है।
48 शहरी निकायों में होंगे चुनाव
इस बार झारखंड के कुल 48 शहरी स्थानीय निकायों में चुनाव कराए जाने हैं। इनमें
• 9 नगर निगम,
• 20 नगर परिषद, और
• 19 नगर पंचायत
शामिल हैं।
कई शहरी निकायों में लंबे समय से निर्वाचित जनप्रतिनिधि नहीं हैं और प्रशासनिक व्यवस्था के भरोसे नगरों का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में इन चुनावों को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
ओबीसी आरक्षण बना था बड़ी बाधा
उल्लेखनीय है कि शहरी स्थानीय निकाय चुनाव में देरी का सबसे बड़ा कारण ओबीसी आरक्षण से जुड़ा मामला रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में यह स्पष्ट किया था कि शहरी निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण देने के लिए राज्यों को ट्रिपल टेस्ट की शर्त पूरी करनी होगी।
ट्रिपल टेस्ट के तहत
1. एक समर्पित आयोग का गठन,
2. स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन से संबंधित वास्तविक आंकड़ों का संग्रह,
3. और कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक न होना
अनिवार्य किया गया है।
4.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि राज्य ट्रिपल टेस्ट की शर्तें पूरी नहीं कर पाते हैं, तो वे ओबीसी आरक्षण दिए बिना भी चुनाव करा सकते हैं। इसी प्रावधान के तहत झारखंड सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक समय तक बाधित न रहे।
राजनीतिक हलचल तेज
चुनाव की संभावित घोषणा को देखते हुए राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल शहरी क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गए हैं। संभावित प्रत्याशियों के नामों पर मंथन शुरू हो चुका है और चुनावी तैयारियां तेज होती नजर आ रही हैं।
जल्द लागू होगी आचार संहिता
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जैसे ही चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की जाएगी, संबंधित शहरी क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसके बाद नामांकन, नामांकन की जांच, चुनाव प्रचार, मतदान और मतगणना की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न कराई जाएगी।कुल मिलाकर, झारखंड में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा अब अंतिम चरण में है। जनवरी के अंतिम सप्ताह में अधिसूचना जारी होते ही राज्य के 48 शहरी निकायों में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्मा ।









