Jharkhand High Court: कर्मचारियों के नियमितिकरण पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 20 साल की सेवा वालों को नियमित करे सरकार, पेंशन व पूर्व सेवा गणना के भी आदेश
झारखंड हाई कोर्ट ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के 20 वर्षों से आउटसोर्सिंग और संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सुपरन्यूमेरेरी पद सृजित करने और सेवा अवधि जोड़ने का भी निर्देश दिया।

रांची। हाईकोर्ट ने अनियमित कर्मचारियों के नियमितिकरण पर बड़ा फैसला सुनाया है। झारखंड हाई कोर्ट ने लंबे समय से संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी पद पर 20 साल से कोई काम कर रहा है, तो इसका मतलब ये हुआ कि उस पद पर जरूरत स्थायी है, ऐसे में उन कर्मचारियों को नियमित करने में दिक्कत नहीं आनी चाहिये।
हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को 20 वर्षों से अधिक समय से कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का निर्देश दिया है।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यदि संस्थान में नियमित पद उपलब्ध नहीं हैं तो कर्मचारियों के समायोजन के लिए अधिसंख्य (सुपरन्यूमेरेरी) पद सृजित किए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था का इस्तेमाल कर्मचारियों को वर्षों तक उनके वैधानिक अधिकारों से वंचित रखने के लिए नहीं किया जा सकता।
अनुकंपा नियुक्ति के बाद आउटसोर्सिंग में भेजे गए थे कर्मचारी
यह मामला शक्तिनाथ महतो और छह अन्य कर्मचारियों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति उनके परिजनों की मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर दैनिक वेतनभोगी के रूप में हुई थी।याचिका के अनुसार, वर्ष 2001 से 2017 तक उन्हें दैनिक वेतनभोगी के रूप में काम कराया गया। इसके बाद उन्हें निजी एजेंसियों के माध्यम से आउटसोर्सिंग व्यवस्था में शामिल कर दिया गया, जबकि वे लगातार संस्थान में स्थायी प्रकृति का कार्य करते रहे।
20 साल तक एक जैसा काम, तो जरूरत भी स्थायी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सौरभ शेखर और अनुराग कुमार ने अदालत को बताया कि कर्मचारी पिछले दो दशकों से संस्थान में नियमित और स्थायी प्रकृति का कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक नियमित नहीं किया गया।इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी से लगातार 20 वर्षों तक एक ही प्रकार का कार्य कराया जा रहा है, तो यह इस बात का प्रमाण है कि उसकी सेवाओं की आवश्यकता स्थायी है।
सेवा अवधि जोड़ने और सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश
अदालत ने आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को कर्मचारियों की पूर्व सेवा अवधि को सेवा निरंतरता में जोड़ने और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ देने का भी निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था का उपयोग कर्मचारियों को कम वेतन देने या उनके कानूनी अधिकारों से बचने के लिए नहीं किया जा सकता।अदालत ने यह भी कहा कि यदि कोई कर्मचारी 20 वर्षों तक संतोषजनक सेवा दे चुका है, तो केवल प्रारंभिक शैक्षणिक योग्यता या तकनीकी कारणों के आधार पर नियमितीकरण से इनकार करना उचित नहीं होगा।
रिक्त पद नहीं होने की दलील भी खारिज
संस्थान की ओर से यह तर्क दिया गया था कि नियमितीकरण के लिए स्वीकृत रिक्त पद उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी दो दशक से अधिक समय से लगातार सेवा दे रहा है, तो उस कार्य को स्वीकृत और स्थायी कार्य माना जाएगा। ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर नियमितीकरण नहीं रोका जा सकता।








