झाऱखंड शिक्षक भर्ती में अभ्यर्थियों की डिग्री में हुआ है बड़ा गोलमाल, 200 से अधिक डिग्री पर संदेह, हाईकोर्ट के आदेश के बाद मची खलबली
JSSC माध्यमिक आचार्य भर्ती में 200 से अधिक अभ्यर्थियों की MA और B.Ed डिग्री जांच के दायरे में आई है। कंप्यूटर हैकिंग मामले में हाईकोर्ट ने CID जांच का आदेश दिया। पढ़ें पूरी खबर।

Ranchi News (JHARKHAND): झारखंड में नियुक्ति विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ आंदोलनरत छात्र और दूसरी तरफ नियुक्ति में हुई गड़बड़ी को लेकर नये-नये खुलासे ने विवाद को गहरा दिया है। शिक्षक भर्ती में डिग्री विवाद से मामले में या एंगल जुड़ गया है। जानकारी के मुताबिक कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। आयोग द्वारा अनुशंसित 877 में से 200 से अधिक अभ्यर्थियों की शैक्षणिक डिग्रियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्क्रीनिंग कमेटी की हरी झंडी न मिलने के कारण अब स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने मामले की गहन जांच का जिम्मा ‘उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग’ को सौंपने की तैयारी कर ली है।जब तक प्रमाणपत्रों का सत्यापन (Degree Verification) पूरा नहीं होता, तब तक नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है।
डिग्री विवाद: जानिये जांच के घेरे में क्यों आईं ये डिग्रियां?
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की स्क्रीनिंग कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार, अभ्यर्थियों की डिग्रियों में कुछ ऐसी असमानताएं पाई गई हैं, जिन्होंने धांधली की शंका को जन्म दिया है:
- निजी यूनिवर्सिटीज का कनेक्शन: संदिग्ध 200 अभ्यर्थियों में से लगभग 100 अभ्यर्थियों ने राज्य के महज दो निजी विश्वविद्यालयों (Private Universities) से एम.ए (MA) और बीएड (B.Ed) की डिग्रियां प्राप्त की हैं।
- गैप इयर्स (Gap Years) पर सवाल: ज्यादातर अभ्यर्थियों के ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रेजुएशन/बीएड के बीच 4 से 6 साल का लंबा अंतर पाया गया है।
- टाइमिंग पर संशय: कई अभ्यर्थियों ने भर्ती का विज्ञापन आने व प्रक्रिया शुरू होने के ठीक पहले ही डिग्रियां हासिल कीं।
- महिला पर्यवेक्षिका भर्ती का असर: इससे पहले ‘महिला पर्यवेक्षिका नियुक्ति’ में भी एक निजी यूनिवर्सिटी की डिग्री का मामला गरमाया था, जिसके बाद विभाग ने माध्यमिक आचार्य परीक्षा में भी सतर्कता बरतने का फैसला किया।
कंप्यूटर हैकिंग मामला: हाई कोर्ट का कड़ा रुख, CID करेगी जांच
डिग्री विवाद के अलावा, इस परीक्षा के संचालन में डिजिटल सेंधमारी (Computer Hacking) का मामला भी अदालत तक पहुंच चुका है।
- हाई कोर्ट का आदेश: झारखंड उच्च न्यायालय ने कंप्यूटर हैकिंग मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के मुख्य सचिव को सीआईडी (CID) के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
- 2,819 अभ्यर्थियों का दोबारा एग्जाम: हैकिंग की शिकायत के बाद JSSC ने 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा आयोजित की थी।
- अंक सार्वजनिक करने के निर्देश: कोर्ट ने जेएसएससी को सख्त आदेश दिया है कि जिन 2,819 अभ्यर्थियों का री-एग्जाम लिया गया था, उनके पहले आयोजित हुए एग्जाम के अंक भी पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक किए जाएं।
भर्ती प्रक्रिया पर क्या होगा असर?
विभाग का पक्ष: काउंसिलिंग की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और अभ्यर्थियों को जॉइनिंग लेटर सौंपने की तैयारी थी। हालांकि, फर्जी डिग्रियों के जरिए अयोग्य अभ्यर्थियों के चयन को रोकने के लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की एनओसी (NOC) के बाद ही अंतिम नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे।
जेएसएससी-जेपीएससी को लेकर विवाद
आपको बता दें कि झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा को लेकर इन दिनों झारखंड में मामला गरमाया हुआ है। छात्रों के आंदोलन के बाद एक साथ राज्य सरकार ने 22 प्रतियोगी परीक्षा को रद्द कर दिया था। हालांकि उनमें से कुछ परीक्षाओं को हाईकोर्ट से राहत मिल गयी है, लेकिन कई भर्ती परीक्षा पर अभी भी ग्रहण लगा हुआ है। ऐसे में अब शिक्षक भर्ती से जुड़े नये विवाद सामने आने के बाद विवाद की आशंका बढ़ गयी है। हालांकि ये विवाद फिलहाल चयन परीक्षा के विवाद से अलग फर्जी डिग्री से जुड़ा है। आपको बता दें कि शिक्षकों की भर्ती अलग-अलग चरणों में अलग-अलग वर्गों के लिए हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि जांच का दायरा कुछ ज्यादा ही बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल प्रारंभिक चरण में 200 ही डिग्री को संदेह के दायरे में रखा गया है।










