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वेतन रोककर स्वास्थ्यकर्मियों को सिस्टम ने बना डाला कंगाल! आवंटन के बाद भी भुगतान नहीं, अफसरों पर फूटा कर्मचारियों का गुस्सा

The system has left health workers destitute by withholding their salaries! Despite the allocation of funds, payments remain unpaid; employees vent their anger at officials.

धनबाद। झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने वाले स्वास्थ्यकर्मी आज खुद ही बदहाल हैं। विडंबना देखिए, जिन कर्मियों के भरोसे सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वही कर्मचारी महीनों से वेतन के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। धनबाद समेत राज्य के कई जिलों में NUHM और NRHM के तहत कार्यरत कर्मचारियों को फरवरी 2026 से मानदेय नहीं मिला है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की ओर से आवंटन जारी हो चुका है, तो आखिर किसके इशारे पर कर्मचारियों का वेतन रोका गया है? अकेले गोविंदपुर प्रखंड में करीब 400 से ज्यादा डॉक्टर कर्मियों का वेतन अधिकारियों की मनमानी के कारण पिछले 4 महीने से लंबित है। ऐसा ही हाल पूरे जिले भर का है।

इधर, झारखंड चिकित्सा जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने अब प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। संघ के जिला मंत्री सत्येंद्र शर्मा ने धनबाद उपायुक्त को भेजे पत्र में विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की लापरवाही, उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये ने हजारों कर्मचारियों को आर्थिक संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है।

तंगहाली की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई स्वास्थ्यकर्मी अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला तक नहीं करा पा रहे हैं। किसी के पास फीस भरने के पैसे नहीं हैं, तो कोई घर का राशन और माता-पिता की दवाइयों के खर्च को लेकर परेशान है। महंगाई की मार अलग से झेलनी पड़ रही है। सवाल यह है कि क्या फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे अधिकारियों को इन परिवारों की तकलीफ दिखाई नहीं देती?

स्वास्थ्यकर्मियों का कहना है कि कोरोना से लेकर हर आपदा में उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर सरकार का साथ दिया, लेकिन आज जब उनके परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं तो सिस्टम ने उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है। वे पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी मेहनत की कमाई कब तक दफ्तरों की फाइलों में कैद रहेगी?

कर्मचारी संघ का आरोप है कि आवंटन आने के बावजूद भुगतान नहीं होना सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता का उदाहरण है। यदि समय पर वेतन नहीं मिलता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? क्या कर्मचारियों की आर्थिक बदहाली के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी या फिर हमेशा की तरह मामला दबा दिया जाएगा?स्वास्थ्यकर्मियों में भारी आक्रोश है और यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो यह नाराजगी बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन नींद से जागता है या फिर स्वास्थ्यकर्मियों के सब्र का बांध टूटने का इंतजार करता है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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