JPSC Protest: सरकार से बातचीत के लिए छात्र तैयार, लेकिन रख दी बड़ी शर्त; 8 सदस्यीय टीम करेगी प्रतिनिधित्व
JPSC Protest: Students ready for talks with the government but have set a major condition; an 8-member team will represent them.

रांची। जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए अपनी रणनीति तय कर ली है। छात्रों ने आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का ऐलान करते हुए साफ कहा है कि बातचीत बंद कमरे में नहीं, बल्कि पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।

छात्रों ने अब सरकार के साथ होने वाली वार्ता के लिए अपनी रणनीति सार्वजनिक कर दी है। आंदोलनकारी छात्रों ने आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है और स्पष्ट कर दिया है कि बातचीत उनकी शर्तों के अनुसार पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए। उनका कहना है कि यह आंदोलन लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए किसी भी तरह की गोपनीय बैठक स्वीकार नहीं होगी।
सरकार के सामने यही छात्र रखेंगे अपनी बात
छात्रों के प्रतिनिधिमंडल में रविन्द्र पासवान, पीयूष कुमार सिंह, रविन्द्र कुमार रवि, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, अंकित कुमार और शालू सिंह को शामिल किया गया है। आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि सरकार के सामने सभी मांगें और तर्क केवल यही छात्र रखेंगे। किसी बाहरी व्यक्ति को छात्रों की ओर से बातचीत करने का अधिकार नहीं होगा।
पत्रकार और वकील रहेंगे, लेकिन नहीं बोलेंगे
छात्रों ने प्रतिनिधिमंडल में दो वरिष्ठ पत्रकार और एक कानूनविद को भी शामिल किया है, लेकिन उनकी भूमिका केवल मार्गदर्शक की होगी। द रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार विकास वर्मा और अधिवक्ता अजीत कुमार बैठक में मौजूद रहेंगे, लेकिन वे सरकार के सामने कोई पक्ष नहीं रखेंगे।
मीडिया की मौजूदगी चाहते हैं आंदोलनकारी
छात्रों का कहना है कि सरकार के साथ होने वाली वार्ता सार्वजनिक होनी चाहिए। उनका मानना है कि यदि बातचीत मीडिया की मौजूदगी में होगी तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और किसी तरह के भ्रम या विवाद की गुंजाइश नहीं बचेगी।हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल के साथ मौजूद पत्रकार बैठक के भीतर कैमरा, माइक या अन्य रिकॉर्डिंग उपकरण लेकर प्रवेश नहीं करेंगे।
सरकार ने दिया था पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का प्रस्ताव
इससे पहले राज्य सरकार की ओर से सदर एसडीओ कुमार रजत आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उन्होंने सरकार की तरफ से पांच सदस्यीय छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया था। छात्रों ने वार्ता के लिए सहमति तो जता दी, लेकिन उसके स्वरूप को लेकर अपनी शर्तें भी सामने रख दीं।
अब सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल आंदोलनकारी छात्र अपने रुख पर कायम हैं। उनका कहना है कि उद्देश्य टकराव नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों का निष्पक्ष समाधान है। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की सार्वजनिक वार्ता की मांग स्वीकार करती है या बातचीत के लिए कोई नया प्रारूप सामने लाती है।








