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झारखंड: “क्या प्रधान सचिव से भी बड़े हैं रांची डीसी” हाईकोर्ट ने दिखाये तीखे तेवर, अवमानना का नोटिस किया जारी

Jharkhand: “Is the Ranchi DC even bigger than the Principal Secretary?” High Court takes a tough stance, issues contempt notice.

रांची 21 अप्रैल 2026। अनुकंपा नियुक्ति मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए रांची डीसी सह अनुकंपा नियुक्ति समिति के अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने रांची डीसी और प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर को 5 मई को व्यक्तिगत रूप से (सशरीर) उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने इस मामले में गंभीर टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब 30 अप्रैल 2019 को प्रधान सचिव सह लेबर कमिश्नर द्वारा याचिकाकर्ता को अनुकंपा के आधार पर नियुक्त करने का स्पष्ट आदेश दिया गया था, तो उसका पालन अब तक क्यों नहीं किया गया।

साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी पूरी जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत की जाए। इससे पहले कोर्ट ने रांची डीसी की ओर से किसी अन्य अधिकारी द्वारा दाखिल शपथ पत्र को अस्वीकार कर दिया था और स्पष्ट कहा था कि इस मामले में डीसी को स्वयं शपथ पत्र दाखिल करना चाहिए।

बाद में डीसी की ओर से दाखिल शपथ पत्र में यह दलील दी गई कि मृतक कर्मचारी के बड़े पुत्र द्वारा एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं दिए जाने के कारण छोटे पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर अनुकंपा नियुक्ति समिति ने छोटे बेटे रूपेश रंजन के आवेदन को खारिज कर दिया।

अदालत ने इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए मौखिक रूप से कहा कि बड़ा पुत्र ‘आश्रित’ की श्रेणी में नहीं आता है और ऐसे मामलों में मृतक के वास्तविक आश्रित के भरण-पोषण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बड़े पुत्र द्वारा एनओसी नहीं भी दिया गया हो, तब भी छोटे पुत्र रूपेश रंजन को नियुक्ति दी जानी चाहिए, खासकर जब इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा पहले ही आदेश जारी किया जा चुका है।

क्या है पूरा मामला?

बताया जा रहा है कि लेबर डिपार्टमेंट में कार्यरत राजकुमार राम की मृत्यु के बाद उनके बड़े पुत्र अनिल कुमार ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए आवेदन किया था। विभाग ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि उनकी आयु निर्धारित सीमा से अधिक है। हालांकि, विभाग ने यह भी माना कि मृतक का छोटा पुत्र रूपेश रंजन आयु सीमा के भीतर है और उसे नौकरी दी जा सकती है।इसके बावजूद नियुक्ति नहीं दिए जाने पर मामला अदालत तक पहुंचा, जहां अब कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। इस मामले ने एक बार फिर अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं।
  • ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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