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High Court: सिर्फ आधार कार्ड के भरोसे तय नहीं होगी उम्र, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला, मुआवजा मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड में दर्ज उम्र को अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। आयु तय करने के लिए मेडिकल रिकॉर्ड समेत सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

Aadhaar Card Age Proof High Court। क्या किसी व्यक्ति की उम्र तय करने के लिए सिर्फ आधार कार्ड ही पर्याप्त है? क्या आधार कार्ड के रिकार्ड के आधार पर ही मुआवजा तय किया जायेगा। इस सवाल पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। अदालत ने साफ कहा है कि आधार कार्ड में दर्ज उम्र को अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता।

यदि किसी मामले में उम्र को लेकर विवाद हो, तो मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज, दिव्यांगता प्रमाणपत्र और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का भी मूल्यांकन करना आवश्यक होगा।यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने मोटर दुर्घटना मुआवजा से जुड़ी तीन अपीलों की सुनवाई के दौरान की। ये पूरा मामला छत्तीसगढ़ का है, जहां हाईकोर्ट ने ये अहम निर्णय लिया है।

आधार कार्ड के कारण बढ़ गया था उम्र का अंतर

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने घायल रंजीत भुंजिया की उम्र को लेकर अलग-अलग दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। क्लेम आवेदन में उनकी उम्र 58 वर्ष, मेडिकल रिकॉर्ड में 60 वर्ष दर्ज थी, लेकिन मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने केवल आधार कार्ड के आधार पर उनकी उम्र 68 वर्ष मान ली थी।हाईकोर्ट ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिर्फ आधार कार्ड के आधार पर किसी व्यक्ति की आयु तय करना न्यायसंगत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ‘सरोज बनाम इफ्को टोकियो (2024)’ निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा कि आधार कार्ड पहचान का महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन यह हर स्थिति में जन्मतिथि या उम्र का अंतिम और निर्विवाद प्रमाण नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा कि यदि अन्य विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध हों, तो उनका भी समान रूप से परीक्षण किया जाना चाहिए।

सभी साक्ष्यों के आधार पर तय होगी उम्र

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनल को आयु निर्धारित करते समय केवल आधार कार्ड नहीं, बल्कि मेडिकल रिकॉर्ड, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, अस्पताल के दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना चाहिए।इसी आधार पर अदालत ने रंजीत भुंजिया की उम्र 61 से 65 वर्ष के बीच मानते हुए मुआवजे में वृद्धि का आदेश दिया।

मुआवजा मामले में भी अहम टिप्पणी

फैसले में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मोटरसाइकिल पर तीन लोग सवार होने मात्र से मुआवजे में कटौती नहीं की जा सकती। जब तक यह साबित न हो कि दुर्घटना का कारण या उसकी गंभीरता तीन सवारी होने से बढ़ी, तब तक इसे योगदानात्मक लापरवाही नहीं माना जाएगा।

क्यों अहम है यह फैसला?

हाईकोर्ट का यह फैसला केवल मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों तक सीमित नहीं माना जा रहा। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि कानूनी विवादों में आधार कार्ड को अकेले उम्र का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। यदि अन्य विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो अदालत और संबंधित प्राधिकरणों को सभी साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होगा। यह फैसला भविष्य में आयु निर्धारण से जुड़े कई मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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