जानते हैं मौसम बदलते ही क्यों बढ़ जाती हैं जुकाम-खांसी की शिकायतें? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान, बचाव के ये 5 तरीके आएंगे काम
मौसम बदलते ही जुकाम, खांसी और गले में खराश क्यों होने लगती है? जानें बदलते तापमान, नमी और एलर्जी का असर और बचाव के आसान तरीके।

Health Desk : मौसम ने करवट ली नहीं कि घर-घर जुकाम, खांसी, गले में खराश और सिरदर्द की शिकायतें सुनाई देने लगती हैं। बच्चे से लेकर बुढ़े तक इसकी चपेट में आते हैं। कई लोग इसे सीधे बदलते मौसम का असर मानते हैं, लेकिन कहानी सिर्फ तापमान बदलने तक सीमित नहीं है। मौसम में बदलाव के साथ तापमान, नमी, हवा और वातावरण में मौजूद एलर्जेंस भी बदलते हैं, जिसका असर शरीर और खासकर सांस की नली पर पड़ सकता है।
यही वजह है कि मौसम बदलते ही कुछ लोगों को छींक, नाक बंद होने, गले में खराश, खांसी, थकान या बुखार जैसी परेशानियां घेर लेती हैं। खासकर बच्चे, बुजुर्ग और एलर्जी या सांस संबंधी समस्या वाले लोगों को इस दौरान ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
मौसम बदलते ही शरीर को क्यों करनी पड़ती है ज्यादा मेहनत?
शरीर अपने आसपास के तापमान और वातावरण के अनुसार खुद को ढालता रहता है। लेकिन जब तापमान और नमी में अचानक बदलाव होता है तो शरीर को नए वातावरण के अनुरूप एडजस्ट होने में समय लग सकता है।
उदाहरण के लिए, बाहर गर्मी से आने के तुरंत बाद बहुत ठंडे एसी कमरे में जाना या सुबह अचानक ठंडी हवा के संपर्क में आना कुछ लोगों में गले और सांस की नली में जलन पैदा कर सकता है।इस दौरान नाक बंद होना, छींक आना, गले में खराश या खांसी जैसी परेशानी महसूस हो सकती है।
सिर्फ ठंड नहीं, वायरस और एलर्जी भी हो सकती है वजह
मौसम बदलने के दौरान जुकाम-खांसी को केवल ठंड लगने से जोड़ना सही नहीं है। सांस से जुड़े कई संक्रमण वायरस के कारण होते हैं। वहीं तापमान और नमी में बदलाव के साथ धूल, परागकण और फफूंद जैसे एलर्जेंस भी कुछ लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं।जिन लोगों को पहले से एलर्जी या अस्थमा की समस्या रहती है, उनमें ऐसे मौसम में लक्षण ज्यादा उभर सकते हैं।
किन लोगों को बदलते मौसम में ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
हर व्यक्ति पर मौसम का असर एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को संक्रमण या एलर्जी का खतरा अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
• छोटे बच्चे
• बुजुर्ग
• कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
• अस्थमा या अन्य सांस संबंधी बीमारी वाले लोग
• एलर्जी से परेशान लोग
इन लोगों को तापमान में अचानक बदलाव से बचने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
बदलते मौसम में बीमारी से बचने के 5 आसान तरीके
1. कपड़ों की लेयरिंग करें
ऐसे कपड़े पहनें जिन्हें तापमान के अनुसार आसानी से कम या ज्यादा किया जा सके। इससे अचानक गर्मी या ठंड के संपर्क में आने से बचने में मदद मिल सकती है।
2. ठंड में भी पानी पीना न छोड़ें
सर्दी के मौसम में प्यास कम लग सकती है, लेकिन शरीर को पर्याप्त पानी की जरूरत बनी रहती है। इसलिए पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहें।
3. नींद से समझौता न करें
पर्याप्त और नियमित नींद शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करती है। देर रात तक जागने और नींद पूरी न होने की आदत से बचें।
4. हाथों की सफाई रखें
भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने के बाद हाथों को अच्छी तरह धोना जरूरी है। बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से भी बचें।
5. कमरे में ताजी हवा आने दें
लगातार बंद कमरे में रहने की बजाय उचित वेंटिलेशन बनाए रखें। मौसम अनुकूल होने पर कुछ समय के लिए खिड़कियां खोलकर कमरे की हवा को बदलना उपयोगी हो सकता है।
AC और हीटर का इस्तेमाल भी रखें संतुलित
बदलते मौसम में बाहर के तापमान और कमरे के तापमान में बहुत ज्यादा अंतर भी परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए जरूरत से ज्यादा ठंडा एसी या बहुत तेज हीटर चलाने से बचें।अगर कमरे की हवा बहुत शुष्क हो रही है या लंबे समय तक बंद कमरा इस्तेमाल किया जा रहा है, तो वेंटिलेशन पर भी ध्यान देना जरूरी है।
जुकाम और खांसी को कब न करें नजरअंदाज?
हल्का जुकाम या खांसी कई बार कुछ समय में ठीक हो सकती है, लेकिन हर लक्षण को केवल मौसम का असर मानना सही नहीं है।अगर तेज या लगातार बुखार बना रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो या लक्षण लगातार बिगड़ते जाएं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
बदलता मौसम बीमारी की अकेली वजह नहीं
बदलते मौसम को सीधे बीमारी की वजह मानने की बजाय इसे एक ऐसा कारक समझना बेहतर है जो शरीर के वातावरण के साथ तालमेल, संक्रमण के संपर्क और एलर्जी के लक्षणों को प्रभावित कर सकता है।इसलिए मौसम बदलते ही घबराने की जरूरत नहीं है। पर्याप्त नींद, पानी, संतुलित भोजन, व्यक्तिगत स्वच्छता और उचित कपड़ों के साथ रोजमर्रा की सावधानियां बरतकर मौसमी परेशानियों से बचने की कोशिश की जा सकती है। :::












