शिक्षा विभाग का गजब कारनामा! 4 साल पहले मौत, फिर भी ट्रेनिंग के लिए बुलावा! शिक्षा विभाग की सूची में ‘भूत’ शिक्षक
दरभंगा के बेनीपुर में 4 साल पहले मृत शिक्षक का नाम ट्रेनिंग सूची में शामिल हो गया। जानें बिहार शिक्षा विभाग की इस चूक की पूरी कहानी और विभाग ने क्या कहा।

Education News। शिक्षा विभाग में कभी-कभी ऐसे मामले सामने आ जाते हैं, जिन्हें पढ़कर पहले हैरानी होती है और फिर सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं। ऐसा ही एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सालों पहले मृत शिक्षक को ट्रेनिंग पर जाने का फरमान मिला है। मामला दरभंगा का है, जहां के बेनीपुर प्रखंड में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है। यहां करीब चार साल पहले दिवंगत हो चुके एक शिक्षक का नाम पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण की सूची में शामिल कर दिया गया।
यानी शिक्षक अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में उनकी ट्रेनिंग अभी भी बाकी है।मामला बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देश पर आयोजित सेवाकालीन प्रशिक्षण से जुड़ा है। बेनीपुर प्रखंड के वर्ग 3 से 5 और वर्ग 6 से 8 तक के शिक्षकों के लिए 28 सितंबर से 3 अक्टूबर तक पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। इसी प्रशिक्षण के लिए जारी 210 शिक्षक-शिक्षिकाओं की सूची में कोठबन्ना मध्य विद्यालय के दिवंगत शिक्षक नरेश हजरा का नाम भी शामिल कर दिया गया।
चार साल पहले निधन, फिर भी ट्रेनिंग के लिए तैयार!
बताया गया है कि नरेश हजरा का निधन करीब चार वर्ष पहले हो चुका है। इतना ही नहीं, उनके पुत्र को अनुकंपा के आधार पर नौकरी भी मिल चुकी है। इसके बावजूद विभागीय प्रशिक्षण सूची में उनका नाम देखकर मामला चर्चा में आ गया।अब सवाल यह है कि जब शिक्षक का निधन वर्षों पहले हो चुका है, तो विभाग के रिकॉर्ड में उनका नाम आखिर किस आधार पर सक्रिय है? क्या विभागीय रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ या फिर अलग-अलग स्तर पर जानकारी के सत्यापन में चूक हुई?
ट्रेनिंग में नहीं पहुंचे तो कार्रवाई की चेतावनी भी
मामले को और दिलचस्प बनाने वाली बात यह है कि प्रशिक्षण पत्र में निर्धारित समय पर प्रशिक्षण में शामिल नहीं होने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।ऐसे में अगर सूची को देखकर कोई सवाल करे कि दिवंगत शिक्षक प्रशिक्षण में क्यों नहीं पहुंचे, तो जवाब शायद रिकॉर्ड से ही मांगा जाना चाहिए। बहरहाल, विभागीय सूची में नाम शामिल होने के बाद यह मामला शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
विभागीय पत्रों में बार-बार आ रहा नाम
कोठबन्ना मध्य विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अशोक कुमार पोद्दार ने बताया कि नरेश हजरा का नाम विभागीय पत्रों में बार-बार शामिल किया जा रहा है। इससे विद्यालय प्रबंधन को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।यानी मामला सिर्फ एक प्रशिक्षण सूची तक सीमित नहीं है। स्कूल स्तर पर भी इस नाम को लेकर विभागीय रिकॉर्ड दुरुस्त करने की जरूरत लंबे समय से बनी हुई दिखाई देती है।
DEO बोले- नाम हटाने की जिम्मेदारी BEO की
मामले पर जिला शिक्षा पदाधिकारी विद्यानंद ठाकुर ने कहा कि मृत शिक्षक का नाम हटाने का दायित्व प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) का है। उन्होंने संभावना जताई कि नाम नहीं हटाए जाने के कारण यह जानकारी ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर दर्ज रह गई होगी।DEO के मुताबिक, डायट से अनुपस्थित शिक्षकों की सूची मिलने के बाद हेडमास्टर की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित नाम को हटाया जाएगा।
रिकॉर्ड अपडेट नहीं हुआ तो सामने आते रहेंगे ऐसे मामले
इस पूरे मामले ने शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड और डेटा अपडेट करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी कर्मचारी या शिक्षक की मृत्यु के बाद भी यदि उसका नाम लगातार विभागीय सूचियों में दिखाई देता रहे, तो इससे न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित होता है, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।
फिलहाल विभाग की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि मामले की प्रक्रिया पूरी होने के बाद दिवंगत शिक्षक का नाम रिकॉर्ड से हटाया जाएगा। लेकिन सवाल यही है कि जब शिक्षक चार साल पहले ही दुनिया छोड़ चुके थे, तो सरकारी रिकॉर्ड को यह खबर पहुंचने में इतना वक्त क्यों लगा?












