झारखंड हाईकोर्ट ने क्यों जतायी नाराजगी ? स्वास्थ्य सचिव को दी दो महीने की मोहलत, पूछा, इतने सालों बाद भी क्यों लागू नहीं हुआ कानून…
Why did the Jharkhand High Court express its displeasure? It granted the Health Secretary two months' time and asked why the law had not been implemented even after so many years.

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में खुले में मांस बिक्री और नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को दो महीने के भीतर मॉडल नियमावली तैयार करने का आदेश दिया है।
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रांची: हाईकोर्ट ने राजधानी रांची समेत पूरे राज्य में खुले में मांस बिक्री और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को लेकर नाराजगी जतायी है। अदालत ने इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि अब तक केवल कागजी कार्रवाई हो रही है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस व्यवस्था लागू नहीं की गई है।
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने श्यामानंद पांडेय द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने कहा कि खुले में मांस की बिक्री न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ भी है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार द्वारा दाखिल जवाब को कोर्ट ने पूरी तरह असंतोषजनक बताया। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि विभिन्न विभाग एक-दूसरे को पत्र लिखकर औपचारिकता निभा रहे हैं, लेकिन समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अदालत ने स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से इस पूरे मामले की निगरानी करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट आदेश दिया कि दो महीने के भीतर एक “मॉडल नियमावली” तैयार कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। इस नियमावली में मांस बिक्री, स्लॉटर हाउस संचालन और खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल करना अनिवार्य होगा।सुनवाई के दौरान अदालत ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन 2011 के अनुपालन को लेकर भी सरकार से तीखे सवाल किए।
कोर्ट ने पूछा कि इतने वर्षों बाद भी इस कानून को प्रभावी रूप से लागू क्यों नहीं किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शुभम कटारुका ने दलील दी कि 19 दिसंबर 2025 की पिछली सुनवाई के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।उन्होंने यह भी कहा कि दुकानों के बाहर खुले में कटे हुए जानवरों का प्रदर्शन न केवल FICCI के दिशा-निर्देशों के खिलाफ है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का भी उल्लंघन है।
इसके बावजूद प्रशासन द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है।मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 22 जुलाई 2026 तय की है। अदालत ने संकेत दिया है कि यदि तय समय सीमा में नियमावली तैयार नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।गौरतलब है कि इससे पहले जुलाई 2023 में एकल पीठ द्वारा भी स्लॉटर हाउस संचालन और मांस बिक्री को लेकर नियम बनाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक उस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है।









