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झारखंड में मुन्नाभाई बना डॉक्टर! RIMS में फर्जी जाति प्रमाण पत्र का बड़ा मामला, MBBS छात्र का एडमिशन होगा रद्द, DC की जांच में खुली पोल

रिम्स रांची में एमबीबीएस छात्र आशीष कुमार का जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया। साहिबगंज डीसी की रिपोर्ट के बाद रिम्स नामांकन रद्द करेगा। सीआईडी भी मेडिकल एडमिशन फर्जीवाड़े की जांच में जुटी है।

रांची। झारखंड में फर्जी सर्टिफिकेट से डाक्टर बनने का मामला शांत नहीं हो रहा है। पहले भी फर्जी सर्टिफिकेट से मेडिकल कॉलेज में एडमिशन का मामला सामने आया था, अब फिर एक नया प्रकरण सामने आया है। खबर है कि झारखंड के सबसे बड़े सरकारी मेडिकल संस्थान रिम्स (RIMS) में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर एक और स्टूडेंट ने दाखिला ले लिया है।

एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार का जाति प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया है। साहिबगंज उपायुक्त (DC) की ओर से इसकी पुष्टि करते हुए जांच रिपोर्ट रिम्स प्रबंधन को भेज दी गई है। अब इस रिपोर्ट के आधार पर रिम्स प्रशासन छात्र का नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। जल्द ही इस दिशा में एक्शन देखने को मिल सकता है।

शिकायत के बाद हुई जांच, खुली फर्जीवाड़े की पोल

रिम्स को शिकायत मिली थी कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र आशीष कुमार ने गलत जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कर मेडिकल सीट हासिल की है। शिकायत मिलने के बाद संस्थान ने प्रमाण पत्र की सत्यता जांचने के लिए साहिबगंज जिला प्रशासन को पत्र भेजा था।साहिबगंज डीसी की जांच में जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया, जिसके बाद इसकी आधिकारिक रिपोर्ट रिम्स को भेज दी गई। अब संस्थान नियमानुसार छात्र का दाखिला निरस्त करेगा।

CID भी कर रही है बड़े फर्जीवाड़े की जांच

रिम्स में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश लेने के मामलों की जांच सीआईडी (CID) भी कर रही है। 24 जून को सीआईडी की टीम रिम्स पहुंची थी और अधिकारियों से पूछताछ करने के साथ तीन विद्यार्थियों के प्रवेश संबंधी दस्तावेज अपने साथ लेकर गई थी। माना जा रहा है कि जांच में और भी कई मामलों का खुलासा हो सकता है।

पहले भी रद्द हो चुके हैं कई एडमिशन

यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी वर्ष 2025 बैच के छात्रों के खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर प्रवेश लेने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
• काजल कुमारी का जाति प्रमाण पत्र गिरिडीह प्रशासन की जांच में फर्जी पाया गया था। इसके बाद दिसंबर 2025 में उसका एमबीबीएस नामांकन रद्द कर दिया गया।
• ओली विश्वकर्मा, जो बीडीएस की छात्रा थी, उसके जाति प्रमाण पत्र की जांच रामगढ़ डीसी से कराई गई थी। जांच में प्रमाण पत्र फर्जी मिलने पर उसका भी एडमिशन निरस्त कर दिया गया।

मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया पर उठे सवाल

लगातार सामने आ रहे फर्जी जाति प्रमाण पत्र के मामलों ने मेडिकल कॉलेजों की प्रवेश प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि सीआईडी जांच पूरी होने के बाद ऐसे अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

अमिताभ सिन्हा

अमिताभ सिन्हा hpbltop.com के वरिष्ठ राजनीतिक संपादक हैं। पत्रकारिता में 12 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्हें भारतीय राजनीति, चुनावी रणनीतियों और संसद की कार्यवाही की गहरी समझ है। अमिताभ की रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित और निष्पक्ष होती है। वे जटिल सरकारी नीतियों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुँचाने में माहिर हैं। खाली समय में वे राजनीतिक इतिहास पढ़ना पसंद करते हैं। ईमेल: amitabh@hpbltop.com

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